कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ दायर जनहित याचिका को अस्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिका दायर करने वाले वकील को कड़ी फटकार लगाई।
सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि पीआईएल के जरिए किसी को निशाना नहीं बनाया जा सकता। महज सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए किसी भी व्यक्ति की ख्याति को नहीं गिराया जाना चाहिए।
हालांकि जस्टिस एचएल दत्तू व जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने अधिवक्ता एमएल शर्मा को याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी।
अधिवक्ता ने जनहित याचिका में हरियाणा में भूमि आवंटन के मामले में वाड्रा के खिलाफ जांच की मांग की थी। पीठ ने कहा कि आपने सिर्फ एक व्यक्ति को चुना। आखिर किस आधार पर, हम जनहित याचिका का उपयोग कर एक व्यक्ति के नाम को बदनाम करने की अनुमति प्रदान करें।
दोषी कहने पर जताई कड़ी नाराजगी
शीर्षस्थ अदालत ने अधिवक्ता की ओर से प्रतिपक्ष को दोषी कहे जाने पर भी कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनका संबंध राजनेताओं से है। महज इसलिए आप उन्हें दोषी नहीं कह सकते हैं।
पीठ ने अधिवक्ता को समझाते हुए कहा कि जनहित याचिका मुद्दों को अदालत की निगाह में लाने का एक अच्छा माध्यम है, लेकिन महज सस्ती राजनीति के लिए इसके जरिए किसी की ख्याति को चोट नहीं पहुंचाई जानी चाहिए।