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विरोध बेअसर, कॉलेजियम पर अड़ी सरकार

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सुप्रीम कोर्ट के तीखे विरोध के बावजूद सरकार ने सोमवार को न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए बने कॉलेजियम सिस्टम में बदलाव लाने वाले राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग बिल को अचानक लोकसभा में पेश कर दिया।
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इससे पहले सरकार ने कांग्रेस के तीखे विरोध को नजरअंदाज करते हुए पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के कार्यकाल में राज्यसभा में पेश किए गए बिल को वापस ले लिया।

सरकार की योजना इसी सत्र में इस बिल को कानूनी जामा पहनाने की है। इसके लिए सरकार कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों से बातचीत कर सर्वसम्मत्ति बनाने का प्रयास करेगी।

बनेगा 6 सदस्यों वाला नया कॉलेजियम

इस बिल के कानूनी जामा पहन लेने के बाद जजों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कॉलेजियम प्रणाली की जगह 6 सदस्यों वाला नया कॉलेजियम बनेगा।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस कॉलेजियम के मुखिया होंगे, जबकि इसमें सुप्रीम कोर्ट के दो न्यायाधीशों, कानून मंत्री और दो प्रतिष्ठित हस्तियों को बतौर सदस्य शामिल किया जाएगा।

पहले की कॉलेजियम व्यवस्था में जजों की नियुक्ति वाले कॉलेजियम में महज जज ही शामिल हैं। बीते बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में इस बिल पर व्यापक चर्चा हुई थी।

पहले नहीं बनी थी आम सहमत‌ि

इस दौरान आम सहमति न बनने के कारण बीमा बिल के लटक जाने से सबक सीखते हुए सरकार ने इस बिल को पेश करने से पहले आम सहमति बनाने का निर्णय लिया था।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक सरकार इसी सत्र में जजों की नियुक्ति हेतु नया कॉलेजियम बनाने के लिए इस बिल को पारित कराना चाहती है।

चूंकि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है, इसलिए तय किया गया कि पहले इस बिल को लोकसभा से पारित कराया जाए।
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व‌िपक्षी दल खासे उत्साह‌ित

हालांकि यूपीए सरकार के दौरान पेश किए गए बिल को वापस लेने के क्रम में सरकार को जिस प्रकार तृणमूल कांग्रेस, सपा, बसपा, द्रमुक और अन्नाद्रमुक का साथ मिला है, उससे नई सरकार खासी उत्साहित है।

सूत्रों का कहना है कि सरकार अंत तक इस मामले में कांग्रेस को मनाने का प्रयास जारी रख सकती है।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस को इस बिल के कुछ प्रावधानों पर आपत्ति है, जबकि कई विपक्षी दल इस बिल को समर्थन देने के लिए राजी हैं। अगर सब कुछ ठीकठाक रहा तो यह बिल इसी सत्र में कानूनी जामा पहन लेगा।
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