पिनाहट के अमरसिंह पुरा के बाद अंधविश्वास का मेला अब आगरा के ककरैठा गांव में भी लग गया है। अपनी बिगड़ी बनाने के लिए जैसे वहां निरक्षर लड़की को देवी मानकर हजारों भक्त पहुंच रहे हैं, ठीक वैसे ही ककरैठा में मरीजों का सैलाब उमड़ पड़ा है 29 साल के एक बाबा के हाथ से ‘चमत्कारी घोल’ के दो घूंट पीने के लिए।
विज्ञापन
न बाबा को मरीजों की बीमारी का पता है, न अपनी जड़ी-बूटी के साइड इफेक्ट। न ही उनके पास मेडिकल प्रैक्टिस की कोई डिग्री या डिप्लोमा है। फिर भी दवा पीने के लिए रोजाना 20 से 25 हजार लोग पहुंच रहे हैं। सोमवार को तो एक लाख लोगों के पहुंचने का दावा है।
मूलरूप से गाजीपुर के रहने वाले शिवशक्ति बाबा भुड़कनाथ का असली नाम है मनोज सिंह यादव। उनके शिष्य बताते हैं कि उन्होंने इंटरमीडिएट के बाद आईटीआई की और फिर शिव की भक्ति करते-करते बाबा भुड़कनाथ बन गए। सात दिन पहले ककरैठा में इनका शिविर लगा है। शुरू के छह दिन किसी से बोले नहीं, बताया कि वे मौन साधना में हैं। रविवार को मीडिया के पहुंचने पर मौन तोड़ दिया।
विज्ञापन
21 दिन दवाई पीने से दूर हो जाती है हर बीमारी
बाबा के ककरैठा के मंदिर में आने से पहले ही उनके भक्तों ने दूर-दूर तक माउथ टू माउथ पब्लिसिटी की, कि बाबा के हाथ से 21 दिन दवाई पीने से हर बीमारी दूर हो जाती है।
बस फिर क्या था, लग गई मरीजों की भीड़। बाबा के पास 500 गाय, तीन घोड़े और तीन कुत्ते हैं। सुबह को बाबा अपने हाथ से ही भोलेबाबा का प्रसाद बताकर दो-दो घूंट दूध पिलाते हैं।
शाम को चार से छह बजे के बीच जड़ी-बूटी और फल-सब्जियों का घोल अपने हाथ से ही मरीजों के मुंह में डालते हैं। इसके लिए मरीजों को अपनी बारी के इंतजार में काफी देर तक मुंह खोलकर रखना पड़ता है।
गर्भवती महिलाओं की नो एंट्री
दवा पिलाने के लिए बाबा के पहुंचने से पहले ही उनके सेवादार माइक से घोषणा करते हैं कि जो महिलाएं गर्भवती हैं, या मासिक धर्म से हैं या काले कपड़े पहने हैं, वे उठकर चली जाएं, वरना बाबा नाराज हो जाएंगे। हालांकि पूछने पर बाबा कहते हैं कि उन्होंने यह आदेश नहीं दिया है।
बाबा साफ कहते हैं कि उनके पास मेडिकल डिग्री या डिप्लोमा नहीं है, न ही उन्होंने आयुर्वेद पढ़ा है। वे स्वीकार करते हैं कि सीएमओ से दवा वितरण की अनुमति नहीं ली गई। सात साल से दवा पिला रहे हैं, अनुमति एक बार भी नहीं ली। घर के लिए दवा न देने के सवाल पर उनका कहना है कि जब जाएंगे, तो 21 दिन की दवाई देकर जाएंगे।
बाबा से पूछा कि यह दवाई आयुर्वेद के किस फॉर्मुले पर बनी है और शरीर में जाकर कैसे काम करती है? बाबा ने इसका जवाब नहीं दिया। क्या एक दवा, सारी बीमारियों को ठीक कर सकती है? इस पर भी बाबा मौन रहे। दवा के बारे में सिर्फ इतना बताते हैं कि इसमें लौकी का जूस, जामुन और कई जड़ीबूटियां हैं।
लट्ठ लेकर खड़े बाबा के सेवादार
मंदिर से पहले बाबा के आठ-दस सेवादार हाथों में लट्ठ लिए खड़े हैं, जो वाहनों को अंदर नहीं जाने देते। पास में ही 15-20 ऑटो खड़े रहते हैं। इतनी भीड़ आने से ऑटो वालों की चांदी हो गई है। ककरैठा में मेले जैसा माहौल है। दुकानों पर भी भीड़ लगी है।
मंदिर में चावल, गेहूं और आलू की बोरियों के ढेर लगे पड़े हैं। मरीज चढ़ावे में पैसों के अलावा खाने-पीने का सामान भी दे रहे हैं। 15 महिलाएं चावल और गेहूं साफ करने में लगी हैं। पूरी व्यवस्था संभालने के लिए 50 सेवादार हैं। बाबा ने एक मीडिया प्रभारी भी रखा है।
मंदिर के अंदर बाबा दवा पिला रहे हैं, तो बाहर दवाई की दुकान भी लग गई है। यहां दर्द निवारण की दवाई सौ और पचास रुपये में दी जा रही है। लोग इसे भी बाबा की बूटी समझकर खरीद रहे हैं।
क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर बीबी यादव का कहना है कि एक दवाई से सभी मर्जों के इलाज का दावा करना, बगैर अनुमति के दवाई देने का शिविर लगाना गैरकानूनी है। डिग्री या डिप्लोमा न रखने वाले शख्स को दवा वितरण की अनुमति नहीं है। सोमवार को विभाग की टीम ककरैठा जाकर जांच करेगी।
सीएमओ डॉ. बीएस यादव का कहना है कि ककरैठा में दवा वितरण शिविर लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग से कोई अनुमति नहीं ली गई है। एफडीए को वहां जाकर देखना चाहिए कि दवा के नाम पर क्या बांटा जा रहा है? एफडीए की रिपोर्ट मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम भी भेजी जाएगी।
सार्वजनिक स्थान पर किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है। ककरैठा में लगे अंधविश्वास के मेले के लिए प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई है। एसपी सिटी राजेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्हें इस आयोजन की जानकारी नहीं है। एलआईयू ने भी अभी तक इसकी रिपोर्ट नहीं दी है। इसे दिखवाया जाएगा।