अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स का कहना है कि उनका चंद्रमा पर जाने का सपना तो जरूर है।
लेकिन आने वाले समय में वे साइंस की टीचर बनना चाहती हैं।
यहां नेहरू साइंस सेंटर में बच्चों से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में सुनीता ने अपनी इस इच्छा जाहिर की।
भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग के मसले पर उन्होंने कहा मैं नासा में रह चुकी हूं। मैंने भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रिश्तों को समझा भी है। इसरो और नासा के बीच भी संबंध बेहतर हो रहे हैं। यह अच्छी बात है।
अंतरिक्ष में अकेला महसूस करने के सवाल पर 47 वर्षीया महिला अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि ऐसा कतई नहीं है। वहां से भी पृथ्वी से संबंध सीधे तौर पर जुड़ा रहता है।
फोन पर परिजनों और मित्रों से कभी भी बात की जा सकती है। चंद्रमा पर फिर जाने का सपना है। सुनीता ने कहा कि मंगल पर जाना अचंभित करने वाला होगा। लेकिन उन्हें महसूस हो रहा है कि एक प्रोफेशनल के तौर पर उनके लिए यह संभव नहीं होगा।