प्रख्यात बांग्ला साहित्यकार और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय का मंगलवार सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। वह पिछले कुछ दिनों से बीमार थे। उनके परिवार में पत्नी स्वाति और बेटा शौविक हैं।
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, गंगोपाध्याय का उनके आवास पर रात दो बजकर 50 मिनट पर निधन हुआ। उनके पार्थिव शरीर को पीस हेवन शमशान में रखा गया है। उनके पुत्र के बोस्टन से आने के बाद बुधवार को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन की सूचना से साहित्य जगह में मायूसी छा गई है।
श्रीशेन्दु मुखोपाध्याय ने अपने शोक संदेश में कहा कि उनके निधन से बांग्ला साहित्य में उत्पन्न हुए शून्य को भरना मुश्किल है क्योंकि सुनील ने बांग्ला साहित्य में एक नई शैली पेश की थी।
200 से अधिक पुस्तकें लिखने वाले गंगोपाध्याय को उनकी रचनाओं के लिए 1985 में साहित्य अकादमी पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा उनको 1989 में आनंद पुरस्कार, 1983 में बंकिम पुरस्कार और 2011 में हिंदू साहित्य पुरस्कार दिया गया। पांच वर्षों तक साहित्य अकादमी का उपाध्यक्ष रहने के बाद 2008 में उनको अकादमी का अध्यक्ष बनाया गया।
उनकी कविताओं की नीरा श्रृंखला को पाठकों ने काफी पसंद किया था। उन्होंने लघु कथा, उपन्यास, यात्रा वृतांत और बच्चों के लिए कथा लिखकर बांग्ला साहित्य में अपना अमूल्य योगदान दिया।