समाज में डर फैला है इसलिए लोग अंधविश्वास पर भरोसा करते हैं। विज्ञान का सहारा लेकर लोगों के मन से इसी डर को निकालने का काम कर रही हैं रोहिणी।
अपनी प्रतिभा के बल पर रोहिणी समाज को जागरूक करने का काम कर रही हैं। लोगों के बीच जाकर वो अंधविश्वास के प्रति लोगों को बताती हैं। पढ़ने में मेधावी रोहिणी का विज्ञान से बेहद लगाव है। पढ़ाई के दौरान अंधविश्वास की हकीकत सामने आई तो दिमाग में आया कि तांत्रिक लोग कैसे लोगों को बेवकूफ बनाते हैं।
फिर क्या था, अंधविश्वास को उखाड़ फेंकने का यह सफर शुरू हो गया। रोहिणी बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं और कम पढ़ी लिखी महिलाओं को ढोंगी बाबा द्वारा निशाना बनाए जाने की खबरें सुना करती थी। इन महिलाओं को तांत्रिक लोग करतब दिखाते हैं और झांसे में लेकर बेवकूफ बनाते हैं।
रोहिणी ने स्कूल और कॉलेजों में जाकर अंधविश्वास का पर्दाफाश किया। छात्राओं और शिक्षिकाओं को बताया कि तांत्रिकों के झांसे में न आएं। विज्ञान मेलों में जाकर तांत्रिकों द्वारा अपनाए जाने वालों हथकंडों की हकीकत उजागर की। तीन बहनों में रोहिणी सबसे बड़ी हैं।
रोहिणी विज्ञान क्लब और प्रगति विज्ञान संस्था के जुड़ी हैं और अंधविश्वास के खिलाफ जंग लड़ रही हैं। वो अब तक अलीगढ़, मेरठ, हरदोई के साथ-साथ कई शहरों में वर्कशॉप आयोजित कर चुकी हैं। मेरठ के नौंचदी मेले और दिल्ली में आयोजति इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेयर में हजारों लोगों को अंधविश्वास के खिलाफ रोहिणी जगा रही हैं। उनके इस काम के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 'मलाला सम्मान' से नवाजा जा चुका है।