प्रतियोगियों की हर मांग के साथ खड़ा होने का दावा करने वाली केंद्र सरकार के वकील उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव के साथ हैं। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में केंद्र सरकार के वकील डॉ. अनिल यादव का मुकदमा लड़ रहे हैं। इसी क्रम में मंगलवार को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पीएस पटवालिया ने हाईकोर्ट में आयोग के अध्यक्ष का पक्ष रखा। इन अधिवक्ताओं की फीस काफी अधिक बताई जाती है।
ऐसे में इन अधिवक्ताओं को पक्ष में खड़ा करने तथा कानूनी लड़ाई में डॉ. अनिल यादव और प्रदेश सरकार कितनी राशि खर्च कर रही है यह तो जांच के बाद पता चलेगा, लेकिन इससे प्रतियोगी भाजपा के खिलाफ जरूर खड़े हो गए हैं। केंद्र सरकार के वकीलों के डॉ. अनिल का पक्ष रखने से प्रतियोगियों में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त नाराजगी है। इतना ही नहीं भाजपा कार्यकर्ताओं में भी इससे गुस्सा है। भाजपा नेता श्रेयांश त्रिपाठी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को पत्र लिखकर छात्रों की नाराजगी से अवगत कराया है और पार्टी की तरफ से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
लोकसभा चुनाव से पहले गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रतियोगियों को आयोग की भर्तियों की सीबीआई जांच का आश्वासन दिया था। इसके बाद राष्ट्रीय प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कांत बाजपेई ने प्रतियोगियों को कानूनी लड़ाई में हर स्तर पर साथ देने का आश्वासन दिया था। ये नेता छात्रों के आंदोलन में शामिल भी हुए।
इन सियासी आश्वासनों के बीच सॉलिसिटर जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट में आयोग अध्यक्ष का पक्ष रखा था। इसी क्रम में मंगलवार को पीएस पटवालिया ने आयोग अध्यक्ष का पक्ष न्यायालय में रखा। इसी मामले में पहले मुकुल रोहतगी के डॉ.अनिल यादव की तरह से यहां आने की बात कही जा रही थी। इस बाबत आरएसएस और भाजपा से जुड़े प्रतियोगियों तथा छात्रों ने राष्ट्रीय नेताओं से विरोध दर्ज कराते हुए हस्तक्षेप की मांग की थी।
अमित शाह को पत्र लिखकर दी मामले की जानकारी
इस विरोध के बावजूद भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप न करने तथा केंद्र सरकार के अधिवक्ताओं के आयोग के अध्यक्ष के पक्ष में खड़े होने से प्रतियोगियों में नाराजगी है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय का कहना है कि भाजपा छात्रों के साथ धोखा कर रही है। एक तरफ वह उनका मुकदमा लड़ने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ केंद्र सरकार के वकील डॉ. अनिल यादव का मुकदमा लड़ रहे हैं। विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
भाजयुमो आईटी सेल के पूर्व संयोजक श्रेयांश ने अमित शाह को पत्र लिखकर बताया कि सिद्धार्थ नाथ सिंह को पूर्व में ही अवगत करा दिया गया था कि पीएस पटवालिया डॉ. अनिल यादव का पक्ष रखने जा रहे हैं। इसके बावजूद भाजपा नेताओं के हस्तक्षेप न करने से छात्रों और प्रतियोगियों में नाराजगी है। श्रेयांश ने लिखा है कि छात्र भारत सरकार पर अनिल यादव के सरंक्षण का आरोप लगा रहे हैं। श्रेयांश ने मांग की है कि पार्टी इस मामले में जल्द से जल्द स्थिति स्पष्ट करे।
आरटीआई के तहत मांगा खर्च का ब्यौरा
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अवनीश पांडेय ने लोक सेवा आयोग की ओर से न्यायिक लड़ाई में हुए खर्च का ब्यौरा मांगा है। अवनीश ने यह जवाब भी मांगा है कि आयोग अध्यक्ष के खिलाफ हो रही सुनवाइयों का खर्च का वहन प्रदेश सरकार कर रही है या खुद डॉ.अनिल यादव। हालांकि निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद आयोग की ओर से इन प्रश्नों का जवाब नहीं दिया गया है।
आयोग अध्यक्ष के मामले में आज आएगा फैसला
लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार यादव की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सभी पक्षों की बहस पूरी हो गई है। अदालत ने अपना निर्णय लिखाना भी शुरू कर दिया है। समयाभाव के कारण आज पूरा निर्णय नहीं लिखाया जा सका। बुधवार को इस मामले पर फैसला आने की उम्मीद है।
आयोग अध्यक्ष की नियुक्ति को प्रतियोगी छात्रों के अलावा कई पूर्व आईआईएस और आईपीएस अधिकारियों ने भी चुनौती दी है। याचिकाओं पर मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। याचीगण का पक्ष अधिवक्ता सतीश चतुर्वेदी और ज्ञानेंद्र श्रीवास्तव ने रखा। याचीगण की दलील थी कि अनिल यादव की नियुक्ति बिना किसी प्रक्रिया को अपनाए कर दी गई है। उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज थे।
अध्यक्ष पद के लिए कुल 83 लोगों ने आवेदन किया था, मगर किसी अन्य के आवेदन तक पर विचार नहीं किया गया। पुलिस ने अपनी पूरी रिपोर्ट एक ही दिन में तैयार करके दे दी। याची पक्ष की ओर से ऐसी तमाम खामियां गिनाई गई। महाधिवक्ता विजय बहादुर सिंह और सुप्रीमकोर्ट से आए अधिवक्ता एएसजीआई पटवालिया ने याचिका की पोषणीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अध्यक्ष की नियुक्ति का अधिकार सरकार को है।
अनिल यादव के खिलाफ ऐसा कोई मामला नहीं है जिससे उनको अध्यक्ष पद के लिए अयोग्य माना जाए, जो मुकदमे बताए जा रहे हैं वह ज्यादातर छात्र जीवन के हैं और अब समाप्त हो चुके हैं। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला लिखाना शुरू कर दिया है।