गलत पहचान के चलते फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद सरबजीत सिंह के दर्द की कहानी अब किताब के जरिए दुनिया के सामने आएगी।
पाक जेलों में बंद भारतीय कैदियों की कानूनी लड़ाई लड़ने वाले पाकिस्तानी वकील ओवैश शेख ने करीब 22 साल पहले सरबजीत के नशे की हालत में गलती से पाकिस्तान पहुंचने से लेकर उसको गलत तथ्यों का सहारा लेकर फांसी की सजा सुनाए जाने तक के पहलू को इस पुस्तक में साक्ष्यों के साथ रखा है। नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब में शनिवार को ओवैश की मौजूदगी में ‘सरबजीत की अजीब दास्तान’ नाम से लिखी इस पुस्तक का विमोचन प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू के हाथों होगा।
अमृतसर पहुंचने के बाद शुक्रवार को ओवैश शेख ने ‘अमर उजाला’ को फोन पर बताया कि इस पुस्तक को अंग्रेजी में ‘सरबजीत; ए मिस्टेकन आईडेंटिटी’ के नाम से पूरी दुनिया में पहुंचाने की तैयारी है। इसके लिए अमेरिका के ग्लोबल स्टडीज इंस्टीट्यूट में इंटरनेशन लॉ के प्रोफेसर एम. महमूद अवान से भी उन्होंने मदद मांगी है। ओवैश ने बताया कि इस किताब के जरिए वह दुनिया को बताना चाहते हैं कि सरबजीत के केस में नेचुरल जस्टिस के आम नियमों तक को ताक पर रखकर उसे दोषी ठहरा दिया गया।
...लेकिन बहन को किताब के कुछ तथ्यों पर ऐतराज
एक ओर जहां पाकिस्तानी वकील ओवैश शेख अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ शताब्दी एक्सप्रेस से अमृतसर से नई दिल्ली की ओर अपनी किताब को रिलीज करने के उत्साह से लबरेज होकर जा रहे थे, दूसरी ओर सरबजीत की बहन दलबीर कौर का कहना है कि किताब में ऐसी तथ्यात्मक गलती हैं जो उनके भाई की रिहाई की राह में रोड़ा बन सकती हैं। इसके अलावा सरबजीत की रिहाई के लिए परिवार और देश के दूसरे तमाम लोगों की कोशिशों को ओवैश की कलम ने नजरअंदाज कर दिया है।
दलबीर कौर ने फोन पर बताया कि प्रकाशक ने उन्हें जो प्रति भेजी है, उसमें घटनाक्रम की तारीखों, सरबजीत की बेटियों की उम्र और परिवार की ओर से उठाए गए दूसरे ऐतराज को विमोचन से पहले दूर कर दिया जाएगा। इसलिए वह शनिवार को ऐतराज को हटाने के बाद संशोधित हुई किताब देखने के बाद ही कार्यक्रम में शामिल होने पर फैसला लेंगी। उनका कहना है कि ओवैश शेख ने परिवार की मदद की है, लेकिन उनके लिए भाई की रिहाई अहम है न कि फिल्म और किताब।