यूपीए के सबसे अहम सहयोगी एनसीपी के प्रमुख और कृषि मंत्री शरद पवार ने खाद्य सुरक्षा कानून को अध्यादेश के जरिए लाने की तैयारी के खिलाफ वीटो लगा दिया है।
अध्यादेश पर कांग्रेस के बढ़ते कदमों को देखते हुए पवार ने खुलकर इसका विरोध करते हुए कह दिया है कि वह बिल पर संसद में चर्चा चाहते हैं। अब बिल को कानून की शक्ल देकर जल्द से जल्द लागू करवाने की दिशा में कांग्रेस के सामने मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।हालांकि कांग्रेस की ओर से इस मसले पर यूपीए के अंदर आम सहमति बनाने की कसरत जारी है।
यूपीए में भारी मतभेद को देखते हुए बिल को अध्यादेश के जरिए लागू कराना मुश्किल होता जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से बृहस्पतिवार को खाद्य मंत्री पीसी थॉमस को अध्यादेश के मुद्दे पर यूपीए के अंदर सहमति बनाने के निर्देश दिए गए थे।
उसके एक दिन बाद ही पवार ने कहा कि वह खाद्य सुरक्षा विधेयक के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वह चर्चा के बाद संसद द्वारा इसकी मंजूरी चाहते है। पवार ने तर्क दिया कि सरकार में हर व्यक्ति चाहता है कि इसे मंजूरी मिले और इसे लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष भी विधेयक के खिलाफ नहीं है।
भले ही पवार बिल के पक्ष में और अध्यादेश के खिलाफ बात कर रहे हों, मगर इससे पहले वह विधेयक को लेकर आशंका जता चुके है कि खाद्यान्न पर भारी रियायत से खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और इससे किसानों के हितों को नुकसान पहुंच सकता है।
पवार के दांव को लेकर कांग्रेस में माना जा रहा है कि उन्होंने खाद्य सुरक्षा विधेयक को रोकने के लिए नई चाल चली है। खास बात यह है कि कांग्रेस में भी अध्यादेश के मुद्दे पर कई बड़े नेता राजी नहीं हैं।
मुख्य विपक्षी दल भाजपा के साथ जनता दल यूनाइटेड ही नहीं, बल्कि वामपंथी पार्टियां भी अध्यादेश के जरिए खाद्य सुरक्षा लागू करने के पक्ष में नहीं हैं। अध्यादेश पर साफ होते राजनीतिक एतराज को देखते हुए सरकार के लिए इसकी राह मुश्किल हो गई है। ऐसे में संसद के मानसून सत्र को जल्दी बुलाए जाने की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता।