बांबे हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा है कि सौतेली मां को अपने सौतेले बेटों से गुजारा भत्ता पाने का हक है। हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें दो भाइयों को अपनी सौतेली मां को गुजारा भत्ता देने का हुक्म दिया गया था।
हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच के जस्टिस टीवी नलवाडे ने डा. रविकुमार और श्रीनिवास चेतलवार की याचिका को खारिज कर दिया था। इन दोनों भाइयों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (जेएमएफसी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें दोनों को अपनी सौतेली मां राधाबाई को 750 रुपये हर महीने देने का निर्देश दिया गया था।
चेतलवार बंधुओं में से एक डॉक्टर और दूसरा महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में इंजीनियर है। दोनों की दलील थी कि राधाबाई उनकी सौतेली मां है और वे सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं हैं।
उन्होंने बांबे हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि कोई सौतेली मां सीआरपीसी की धारा 125 के दायरे में नहीं आतीं।
हालांकि राधाबाई के वकील ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया। शीर्ष कोर्ट की राय थी कि बिन बच्चों की सौतेली मां भी अपने सौतेले बेटे से गुजारा भत्ता लेने का दावा कर सकती है।