चीन के युनान प्रांत में बुद्ध की संभोगरत प्रतिमा विवाद का कारण बन गई है। युनान प्रांत के एक बार में बुद्ध जोड़े की चार मीटर ऊंची ये प्रतिमा लगी है। प्रशासन के पास पहुंची ईशनिन्दा की शिकायतों के बाद इस विवादित प्रतिमा को हटाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
खास बात ये है कि बार मालिक ने ये प्रतिमा एक भारतीय मूर्तिकार से बनवाई है।
सूत्रों के मुताबिक युनान प्रांत के लिजेंग शहर में यानयू पब में यह सेंटरपीस लगा है। इसमे पुरुष बौद्ध की जांघों पर एक महिला बौद्ध कमल मुद्रा (कामशास्त्र में दर्ज एक मुद्रा) में बैठी है। पिछले दिनों इस प्रतिमा को देखने वालों की काफी भीड़ रही।
लिजेंग शहर दक्षिणी चीन का एक प्रख्यात टूरिस्ट शहर है जिसे प्रेम का शहर भी कहा जाता है। यहां प्रेम को प्रोत्साहित करती प्रतिमाएं जगह जगह मिलती है।
इस प्रतिमा ने शहर में नया विवाद पैदा कर दिया है। पहला विरोध शहर के प्रशासन द्वारा जाहिर किया गया है। प्रशासन का कहना है कि इस तरह की प्रतिमा बुद्ध की गलत छवि पेश करती है और साथ ही इससे चीनी संस्कृति के संबंध में भी गलत संकेत जाता है।
इंटरनेट पर इसे 'ब्लासफेमी' यानी ईशनिंदा करार दिया है।
इसके जवाब में बार मालिक मिस्टर लिन ने कहा है कि यह प्रतिमा तिब्बती बौद्ध जीवन को दर्शाती है और इसमें प्रेम के अलावा कुछ भी नहीं है।
बार मालिक ने स्पष्ट किया कि उसका इरादा किसी संस्कृति और सभ्यता का अपमान करने का नहीं है। इसे प्रेम के संदर्भ में देखा जाना चाहिए न कि ईशनिन्दा के।
बार मालिक ने कहा कि उसके सेंटरपीस में प्रसन्न बुद्ध की छवि को उकेरा गया है। प्रतिमा में पुरुष बुद्ध न्याय को संचालित कहता है और महिला बुद्ध बौद्धिकता का प्रतिनिधित्व करती है। ये प्रतिमा सौभाग्य और प्रेम का प्रतीक है जिसे सभी तिब्बती आदर से देखते हैं।