उत्तर प्रदेश में राज्य विश्वविद्यालयों से एमफिल एवं पीएचडी करने वाले शोधार्थियों को भी फैलोशिप मिलने के रास्ते खुलते नजर आ रहे हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इस योजना पर अपनी सैद्घांतिक सहमति दे दी है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में इसके लिए बजट प्रस्तावित किए जाने की तैयारी है। योजना लागू होने के बाद एमफिल एवं पीएचडी अभ्यर्थियों को क्रमश: 5000 एवं 8000 रुपये फैलोशिप के रूप में प्रति माह मिलेंगे। इसके अलावा कुछ वार्षिक कंटीजेंसी भी दिए जाने का प्रस्ताव है।
राज्य विश्वविद्यालयों में आम तौर पर जूनियर रिसर्च फैलोशिप के लिए क्वालीफाई करने वाले शोधार्थी ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग से फैलोशिप पाते हैं। इसके अलावा फैलोशिप के अन्य स्कीमों एवं प्रोजेक्ट में चयनित शोधार्थियों को भी सामाजिक विज्ञान शोध संस्थानों एवं वैज्ञानिक शोध संस्थानों से समयबद्ध फैलोशिप मिलती हैं। वहीं, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में इन योजनाओं के अलावा भी एमफिल एवं पीएचडी में पंजीकृत शोधार्थियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग हर महीने फैलोशिप प्रदान करता है। एमफिल छात्रों के लिए पहले यह धनराशि 3000 रुपये एवं पीएचडी छात्रों के लिए 5000 रुपये प्रति माह थी। अब इसे रिवाइज कर क्रमश: 5000 एवं 8000 रुपये कर दी गई है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का जोर 12वीं योजना में शोध को बढ़ावा देने एवं शिक्षण को कॅरिअर के रूप में प्रोत्साहित करने पर है। यही वजह है कि इस योजना के दायरे में राज्य विश्वविद्यालयों को भी लाने की तैयारी की जा रही है। 12वीं पंचवर्षीय योजना में राज्य विश्वविद्यालयों के लिए भी इस फैलोशिप के लिए बजट आवंटित किया जाएगा। हालांकि एमफिल एवं पीएचडी छात्रों की अधिक संख्या होने की दशा में विश्वविद्यालय अपने स्तर से कुछ और क्राइटेरिया भी निर्धारित कर सकते हैं।
मसलन कुछ केंद्रीय विश्वविद्यालयों में केवल ऐसे एमफिल एवं पीएचडी छात्रों को योजना में शामिल किया जाए जो नेट क्वालीफाई हों। लखनऊ विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. राजेश मिश्र कहते हैं कि यूजीसी की यह पहल राज्य विश्वविद्यालयों के शोधार्थियों को बेहतर संदर्भ एवं संसाधन जुटाने में मदद करेगी। हालांकि योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह से होना चाहिए एवं नियमित तौर पर फैलोशिप मिलनी चाहिए। अभी जेआरएफ अभ्यर्थियों को भी कभी-कभी साल भर फैलोशिप के लिए इंतजार करना पड़ता है। साथ ही उनका यह भी सुझाव है कि यदि शोधार्थी को फैलोशिप दी जा रही है तो उसकी उपयोगिता के लिए मानक भी कड़े किए जाने की आवश्यकता है।