श्रीलंका की राजनीति में अच्छी छवि के नेता माने जाने वाले मैत्रिपाला सिरिसेना ने हालिया राष्ट्रपति चुनावों में महिंद्रा राजपक्षे को करारी शिकस्त दी है। सिरिसेना की इस जीत में मोदी की भी अहम भूमिका है। बताया जाता है कि सिरिसेना ने भी सोशल मीडिया का ठीक उसी तरह इस्तेमाल किया जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के आम-चुनाव 2014 में किया था।
विरासत में राजनीति पाने वाले लॉ ग्रेजुएट महिंद्रा राजपक्षे की हार पर हर किसी को अचरज हो रहा है। जानकारों का मानना है कि श्रीलंका की राजनीति में करीब 10 साल तक शासन चलाने वाले महिंद्रा राजपक्षे को अपने परिवार-वाद के चलते ही मुंह की खानी पड़ी है। महिंद्रा राजपक्षे के हार स्वीकार करने के तुंरत बाद मैत्रिपाला सिरिसेना ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सूचना दी, "मैं उन हजारों लोगों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं जिन्होंने मुझपर विश्वास दिखाया है। अब उदार मैत्रि-युग की शुरुआत करते हैं।"
सिरिसेना की इस जीत को अभूतपूर्व माना जा रहा है क्योंकि किसी ने भी ऐसी उम्मीद नहीं की थी। उन्होंने तमिल वर्चस्व वाले उत्तर और पूर्वी क्षेत्रों में बड़ी जीत हासिल की है, साथ ही केंद्र की राजनीति में सबसे अहम माने जा रहे कोलंबों में भी उन्होंने उम्दा प्रदर्शन के साथ जीत हासिल की है। उन्होंने कहा कि खंडित विपक्ष और अल्पसंख्यक वोटों के राजपक्षे के खिलाफ होने ने ही उन्हें इस जीत के लिए प्रेरित किया।
फ्रीडम पार्टी के सबसे मजबूत नेताओं में से एक हैं सिरिसेना
सिरिसेना राजपक्षे के मंत्रिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री थे। श्रीलंका के सत्तारूढ़ पार्टियों का साथ छोड़ने से पहले सिरिसेना, श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के सबसे मजबूत नेताओं में से एक माने जाते थे। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सिरिसेना सिंहली समुदाय से आते हैं। हालांकि महिंदा भी श्रीलंका के बहुसंख्यक सिंहली समुदाय से ही आते हैं।
विपक्षी गठबंधन ने राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में सिरिसेना का नाम आखिरी समय तक गुप्त रखा था। हालांकि जानकारों का यह भी मानना है कि उनके पास राष्ट्रपति वाला पारंपरिक करिश्माई व्यक्तित्व नहीं है।
सिरिसेना ने अल्पसंख्यकों के अधिकार और श्रीलंका के जातीय संघर्ष को लेकर कभी भी स्पष्ट रूख नहीं अपनाया है और ना ही उन्होंने कभी तमिलों के खिलाफ कथित तौर पर युद्ध अपराध में शामिल रहे किसी भी नेता के ऊपर कार्रवाई करने की बात कही है।
शराब और धूम्रपान के शख्त विरोधी सिरिसेना साल 2008 में एक हादसे में बाल बाल बचे थे। उनके काफिले पर तमिल टाइगर के आत्मघाती हमलावारों ने हमला किया था। वो राजपक्षे की कैबिनेट में शरीक जरूर थे लेकिन वो अपने आप को राजपक्षे के शासनकाल में उपेक्षित महसूस कर रहे थे।
साल 1967 से राजनीति में सक्रिय हैं सिरिसेना
सिरिसेना एक अनुभवी राजनेता हैं और वो साल 1967 से ही राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने महज 17 साल की उम्र में एसएलएफपी को ज्वाइन किया था। उन्हें साल साल 1994 से अब तक काफी सारे मंत्रालयों में काम करने का अच्छा खासा अनुभव है।
उनके प्रमुख चुनावी मुद्दों में सबसे अहम बात श्रीलंका के संविधान में किए गए उन 18 संशोधनों को वापस लेना है जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे के दो कार्यकालों के दौरान पारित किया गया था।
सिरिसेना ने कहा कि वो श्रीलंका के विवादास्पद कार्यकारी राष्ट्रपति पद को भी समाप्त करेंगे और प्रधानमंत्री पद की व्यवस्था को पुन: बहाल करेंगे जिसे राजपक्षे ने खत्म कर दिया था। उन्होने कहा कि वो विपक्ष के नेता रेनिल विक्रमसिंघे की बतौर प्रधानमंत्री बहाली करेंगे।
सिरिसेना ने अगले तीन महीनों में संसदीय चुनाव कराने का वादा भी किया है। सिरिसेना ने बताया कि उनके लक्ष्य निर्धारित हैं जिन्हें 100 दिन के भीतर-भीतर पूरा किया जाना है। सिरिसेना ने देश में सत्ता विरोधी लहर और सोशल मीडिया के उम्दा इस्तेमाल से बड़ी जीत हासिल की है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सोशल मीडिया के उम्दा इस्तेमाल से जनता का भरोसा जीतने में कामयाबी पाई थी।