दक्षिण भारत में भाजपा के दिग्गज नेता रहे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने रविवार को आधिकारिक रूप से नई पार्टी कर्नाटक जनता पार्टी (केजेपी) का गठन किया। येदियुरप्पा के नई पार्टी की कमान संभालते ही राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा में फूट और बढ़ती नजर आने लगी है।
गौरतलब है कि नई पार्टी के ऐलान के लिए येदि द्वारा हावेरी में आयोजित रैली में भाजपा के 13 विधायक सार्वजनिक रूप से मंच पर पहुंचे, जबकि भाजपा आलाकमान ने ऐसे करने वाले विधायकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। साथ ही भाजपा ने बगावत रोकने के लिए शनिवार को राज्य के मंत्री बीजे पुतुस्वामी और लोकसभा सांसद जीएस बसवराज को पार्टी से निलंबित कर दिया था। केजेपी की रैली में शनिवार को मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले सुनील वलयापुरे भी मौजूद थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने की अपील की।
रैली को संबोधित करते हुए येदियुरप्पा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार की कड़ी आलोचना की और उन्हें नए सिरे से जनादेश हासिल करने की चुनौती दी। येदि ने कहा कि सीएम ने कहा था कि केजेपी की रैली में शामिल होने वाले भाजपा विधायकों पर कार्रवाई होगी, लेकिन अब उन्हें यह समझना चाहिए कि उनकी सरकार अल्पमत में आ गई है। वे सीएम की कुर्सी पर सिर्फ इसलिए हैं, क्योंकि अब तक उन्हें मेरा समर्थन हासिल था। अगर उनमें हिम्मत है तो फिर विधानसभा भंग कराएं और चुनाव मैदान में उतरें।
केजेपी की रैली में शामिल होने वाले भाजपा विधायकों में एच हलप्पा, नेहरू ओलेकर, बीपी हरीश, सीसी पाटिल और सुनील वालयापुरे शामिल थे। इन विधायकों के येदि के साथ जाने को राज्य की भाजपा सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इतना ही नहीं रैली से पहले भाजपा के विधान परिषद सदस्य शिवराज सज्जन द्वारा आयोजित जलपान पर पार्टी के कम से कम 21 विधानसभा विधायक, 7 विधान परिषद विधायक और चार लोकसभा सांसद शामिल हुए। जलपान में येदियुरप्पा भी मौजूद थे।
जलपान में मौजूद विधायकों में बसावाराज बोम्मई, सीएम उदासी, मुरुगेश निरानी और शोभा करानदलाजे समेत सात मंत्री भी शामिल थे, लेकिन वे रैली में शामिल नहीं हुए। गौरतलब है कि 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में भाजपा के 118, कांग्रेस के 71, जद-एस के 26 और 7 निर्दलीय विधायक हैं। दो सीटें खाली हैं।
भगवा रंग से भी तोड़ा नाता
भगवा रंग को गले लगाकर सियासी जगत में चमकने वाले येदियुरप्पा ने अपनी नई पार्टी में इस रंग को कोई जगह नहीं दी है। केजेपी के नए झंडे का रंग पीला, सफेद और हरा रखा गया है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि ऐसा जानबूझकर किया गया है। अब हम भगवा की राजनीति नही करेंगे, क्योंकि भाजपा ने येदियुरप्पा के साथ जो कुछ भी किया वह किसी भी नजरिए से सही नहीं था।
'मुझसे ज्यादा दागदार हैं कईयों के दामन'
नई पार्टी के सम्मेलन में औपचारिक रूप से पार्टी की कमान संभालने के बाद येदियुरप्पा ने केंद्र में सत्ता और विपक्ष में बैठी सभी पार्टियों को आडे़ हाथों लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र में सत्ता में बैठे बडे़-बडे़ नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक से बढ़कर एक गंभीर आरोप लगे, लेकिन किसी के खिलाफ कुछ नहीं हुआ। सिर्फ उन्हें ही निशाना बनाया गया।