दरिंदगी का शिकार बनीं जिन लड़कियों ने हंसना-बोलना ही नहीं, पढ़ना-लिखना तक छोड़ दिया था, वे अब फिर से जमाने के साथ कदमताल कर रही हैं। इनकी मुरझाई सी जिंदगी में फिर से खिलखिलाहट ला दी है 'अपराजिता' ने।
पुलिस के इस कार्यक्रम ने इन्हें हौसलों की नई उड़ान दी है। जो लड़कियां गर्दन झुकाकर भी बोल नहीं पाती थीं, वे अब सिर उठाकर अपनी उपलब्धियां बता रही हैं। आगरा की ये 30 बहादुर बेटियां अब पूरे प्रदेश की रेप पीड़िताओं के लिए प्रेरणा बनेंगी।
इसकी शुरुआत हुई थी 20 नवंबर 2014 को। डीआईजी लक्ष्मी सिंह ने 2009 से 2014 तक के रेप के मामलों का अध्ययन कराकर 15 साल उम्र तक की बच्चियों की सूची बनवाई। अभिभावकों समेत इन सभी की काउंसलिंग कराई गई।
इसमें पता चला कि रेप के बाद लड़कियां ही नहीं, उनके माता-पिता भी टूट चुके हैं। गुनाह किसी और ने किया, लेकिन अपमानित खुद को महसूस कर रहे हैं। कई ने तो बच्चियों का घर से निकलना बंद कर दिया। 10 अभिभावकों ने बेटियों के स्कूल से नाम कटवा दिए। जरूरत इनकी मनोदशा बदलने की थी।