प्रमोशन में आरक्षण के मसले पर यूपीए सरकार से खफा सपा ने अब केंद्र के खिलाफ हमलावर रुख अपना लिया है। शुक्रवार को सपा ने यूपीए सरकार पर गन्ना किसानों को वाजिब मूल्य नहीं देने का आरोप लगाया।
सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने सरकार से सवाल किया कि उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार द्वारा तय गन्ने के मूल्य में इतना अंतर क्यों है। उन्होंने केंद्र सरकार पर गन्ने का कम मूल्य तय करने का आरोप लगाते हुए इसकी वजह पूछी। सरकार की ओर से कई बार जवाब देने के बाद सपा ने असंतोष जाहिर करते हुए सदन से वॉकआउट किया।
राज्यसभा में शुक्रवार को प्रश्नकाल के दौरान गन्ना मूल्य तय करने को लेकर नरेश अग्रवाल ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से गन्ने का मूल्य 147.96 प्रति क्विंटल रुपये तय किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश ने गन्ने की कीमत 290 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है।
अग्रवाल ने कहा कि दोनों कीमतों में लगभग दुगने का फर्क है। उन्होंने कहा कि एक आध रुपये का फर्क होता तो समझ आता है, लेकिन इतना बड़ा अंतर कैसे हो रहा है। केंद्र सरकार का मूल्य तय करने का क्या आधार है। अग्रवाल ने कहा कि चाहे गन्ने का हो या फिर धान का मूल्य केंद्र सरकार किसानों के लिए गलत मूल्य निर्धारित करती है।
इसलिए सरकार को इसका आधार स्पष्ट रूप से बताना चाहिए। जवाब में केंद्रीय राज्यमंत्री तारिक अनवर ने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग विभिन्न तथ्यों को ध्यान में रखते हुए गन्ने का उत्पादन मूल्य तय करता है, जबकि राज्य समर्थन मूल्य की घोषणा राज्य सरकारों द्वारा की जाती है।
अनवर ने कहा कि सरकार गन्ने का मूल्य तय करने से पहले विशेषज्ञों की राय लेती है। 16 कृषि विश्वविद्यालय से मिली जानकारी पर विचार करती है और राज्य सरकारों से भी बातचीत करती है। उन्होंने कहा कि राज्य अपना मूल्य तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। मंत्री के जवाब से अग्रवाल संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद उन्होंने सरकार पर किसानों को कम कीमत देने का आरोप लगाया और अपनी पार्टी के सदस्यों के साथ सदन से बाहर चले गए।