महिलाओं के खिलाफ अपराध को रोकने के लिए आपराधिक कानून संशोधन विधेयक 2013 को लेकर सपा के विरोध ने जहां सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं तो बसपा का साथ पाकर उसे कुछ राहत मिली है।
सपा ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यदि विधेयक पर संसद में मतदान की नौबत आती है तो वह इसके खिलाफ वोट करेगी।
वहीं बसपा सुप्रीमो ने ऐलान किया है कि वह महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए किसी भी सूरत में इस बिल को संसद से मंजूर कराने में सरकार की मदद करेंगी।
महिलाओं के खिलाफ
एंटी रेप बिल को लेकर सपा ने शुक्रवार को एक बार फिर अपना कड़ा विरोध जताया। पार्टी महासचिव राम गोपाल यादव ने कहा कि हम बिल का विरोध करते हैं। यह दिमागी रूप से कुछ पंगु लोगों की सिफारिश पर तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि सहमति से सेक्स की उम्र 18 से घटाकर 16 करना ही नहीं बल्कि बिल में ऐसे कई प्रावधान हैं, जिससे महिला और पुरुष की अलग अलग दुनिया बन जाएगी।
यादव ने कहा कि यह बिल महिलाओं के खिलाफ है। कामकाजी महिलाओं को इससे सबसे ज्यादा नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि सपा 18 मार्च को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में भी बिल का विरोध करेगी।
बिल को महिला विरोधी करार देते हुए सपा नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि इस बिल के लागू होने के बाद नियोक्ता महिलाओं को नौकरी पर रखने से कतराने लगेंगे।
उन्होंने कहा कि सपा का मानना है कि इस बिल से महिलाओं ही नहीं, बल्कि पुरुषों के लिए भी समस्याएं खड़ी होंगी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस बिल का विरोध करेगी।
समर्थन करेगी बसपा
वहीं बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों को रोकने के लिए इस बिल का पारित होना बहुत जरूरी है। इसलिए बसपा इसके रास्ते में आने वाली हर अड़चनों को दूर करने के लिए बिल का समर्थन करेगी।
उन्होंने कहा कि बिल को लेकर उनको जो बातें कहनी है, वह संसद में कहेंगी। कुछ बातों को लेकर बसपा की अपनी राय है, लेकिन वह इसे बहस के दौरान ही सरकार के सामने रखेगी।
भाजपा 18 मार्च को स्पष्ट करेगी रुख
सरकार पर बलात्कार विरोधी बिल पर हड़बड़ी में कदम उठाने का आरोप लगाते हुए भाजपा ने कहा कि इस प्रस्तावित विधेयक पर वह अपना रुख 18 मार्च की सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट करेगी।
संसद के बाहर मीडिया से बातचीत में भाजपा नेता वेंकैया नायडू ने कहा कि उनकी पार्टी कड़े बलात्कार विरोधी बिल के पक्ष में है। भाजपा चाहती है कि इस तरह के अपराध को अंजाम देने वालों को कठोर से कठोर सजा मिले।
केंद्र पर हमला करते हुए नायडू ने कहा कि सरकार ने निजी कारणों से पहले इस मुद्दे पर हड़बड़ी में कदम उठाया और अध्यादेश जारी कर दिया और अब वह अध्यादेश में बदलाव करना चाहती है।
अब सरकार ने सलाह-मशविरा की प्रक्रिया शुरू की है। उन्हें यह काम बहुत पहले करना चाहिए था। नायडू ने कहा कि भाजपा सर्वदलीय बैठक में इस मुद्दे पर पूरी स्पष्टता के साथ अपने विचार रखेगी।