फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लोकसभा चुनाव: सपा ने फूंका चुनावी बिगुल

Fri, 16 Nov 2012 10:43 PM IST
लखनऊ/ब्यूरो
विज्ञापन
विज्ञापन
समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को लोकसभा चुनाव के लिए सूबे की 80 सीटों में से 55 पर प्रत्याशियों की घोषणा के साथ चुनावी समर का बिगुल फूंक दिया है। पहली सूची में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह समेत यादव-परिवार के चार सदस्य हैं।
विज्ञापन


डिंपल यादव और धर्मेंद्र यादव अपनी मौजूदा सीट कन्नौज और बदायूं से लडे़गे जबकि पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय को फीरोजाबाद से उतारा गया है। विधानसभा अध्यक्ष माताप्रसाद पांडेय और राज्यमंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल को भी पार्टी ने चुनाव लड़ाने का फैसला किया है।

लिस्ट में दागी भी हैं और दूसरे दलों के बागी भी। चार मुसलिम और छह महिला प्रत्याशियों के नाम भी पहली सूची में शामिल हैं। मुलायम सिंह सहित 22 में 18 सांसदों को उनके मौजूदा क्षेत्रों से ही टिकट दे दिया गया है।
विज्ञापन

प्रत्याशियों की सूची से संकेत मिलता है कि सपा ने टिकट देने में कई रणनीति को ध्यान में रखा है।

सूची में जहां कई बड़े चेहरे शामिल हैं तो सपा ने अपने नेताओं के परिजनों को ही नहीं बल्कि अन्य प्रमुख नेताओं, मंत्रियों के परिवार वालों को भी टिकट देने में कंजूसी नहीं की है। कुछ लोगों को उनके क्षेत्र के बजाय दूसरी जगह मैदान में उतारा गया है।

चर्चा है कि इसके पीछे पार्टी की अपनी आंतरिक वजह और नेताओं की खींचतान व वर्चस्व है। बहराइच के शब्बीर वाल्मीकि नाम से तो मुसलिम लगते हैं लेकिन उनका टिकट अनुसूचित कोटे का है। पार्टी प्रवक्ता व राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव ने पहली सूची जारी करते हुए दावा किया कि सपा पहला दल है जिसने सबसे पहले अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा करके दूसरे दलों से बढ़त हासिल कर ली है।

अक्षय को एंट्री तो प्रतीक की भी चर्चा
परिवार से तीन मौजूदा सांसदों के साथ पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल के पुत्र अक्षय यादव को फिरोजाबाद सीट से उतारकर राजनीति में एंट्री की औपचारिकता पूरी कर दी गई है। चर्चा है कि मुलायम के दूसरे पुत्र प्रतीक यादव को भी इसी लोकसभा चुनाव से राजनीति में प्रवेश दिया जा सकता है। उन्हें आजमगढ़ से चुनाव मैदान में उतारने की संभावना जताई जा रही है।

जातीय गणित
सपा के 55 प्रत्याशियों में सबसे ज्यादा 10 ठाकुर हैं। चार मुसलिम, 8 यादव, 5  कुर्मी, 4 ब्राह्मण, 2 जाट, 2 निषाद, एक-एक गूजर, चौहान, भूमिहार, वैश्य, शामिल है। इसके अलावा 14 दलितों को टिकट दिया गया है।

यहां अभी घोषणा नहीं
जिन क्षेत्रों के टिकटों की घोषणा नहीं की गई है, उनमें रामपुर, बुलंदशहर, मिर्जापुर और गाजीपुर शामिल हैं। पिछले चुनाव में रामपुर से सांसद चुनी गईं जयाप्रदा पार्टी छोड़ गई हैं जबकि बुलंदशहर से सपा सांसद कमलेश वाल्मीकि को पिछले चुनाव में कल्याण सिंह के कारण चुनाव लड़ाया गया था। संभवत: इसी कारण अभी उनके टिकट को हरी झंडी नहीं मिल पाई है।

कांग्रेस पर दबाव की रणनीति तो नहीं
यह पूछने पर कि संसद का सत्र शुरू होने से ऐन पहले प्रत्याशियों की घोषणा की खास वजह है। प्रो. ने कहा कि राजनीतिक दलों के फैसला लेने के पीछे कई वजहें होती हैं। रायबरेली व अमेठी के बारे में पूछे गए सवाल पर रामगोपाल ने यह कहकर रहस्य गहरा दिया कि अभी दोनों जगहों के बारे में कोई फैसला नहीं किया गया है।

आगे जैसा होगा वैसा फैसला किया जाएगा। रायबरेली के सिलसिले में पूर्व घोषणा की याद दिलाने पर प्रो. बोले, ‘फैसले समय के साथ होते हैं।’ दागियों को टिकट देने के बारे में सवालों पर प्रो. ने कहा कि सिर्फ पुलिस के मामले दर्ज कर लेने से ही कोई अपराधी नहीं हो जाता।
विज्ञापन


और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें