भाजपा ने कहा है कि लोकसभा में भले ही सरकार रिटेल में एफडीआई के प्रस्ताव में जीत गई हो, लेकिन यह मामला विपक्ष बनाम एफडीआई का नहीं था। लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि वास्तव में यह मुद्दा सीबीआई बनाम एफडीआई था।
उन्होंने कहा कि यही वजह है कि सदन में चर्चा के दौरान रिटेल में एफडीआई के खिलाफ जम कर बोलने वाले सपा-बसपा सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने कहा कि भाषण हमारे साथ और मतदान सरकार के साथ। दोनों की इस कथनी-करनी को देशवासियों ने देख लिया है।
उन्होंने कहा कि यदि सपा-बसपा ने विपक्ष के साथ मतदान किया होता तो आज रिटेल में एफडीआई का फैसला लोकसभा में गिर जाता और करोड़ों लोगों की रोजी-रोटी पर आया संकट टल जाता। उन्होंने कहा कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और बसपा प्रमुख मायावती को सरकार शुरू से सीबीआई का भय दिखाती रही है।
उन्होंने लालू का बगैर नाम लिए कहा कि वे तो सीबीआई से इतने भयभीत हैं कि उनकी पार्टी ने सरकार के पक्ष में ही मतदान कर दिया। सुषमा ने कहा कि मुलायम सिंह कह रहे थे कि आज यदि महात्मा गांधी और राममनोहर लोहिया होते तो एफडीआई का फैसला लागू नहीं होता, जबकि यह सांप्रदायिक मतदान नहीं हो रहा था, इससे साफ है कि सपा और बसपा के नेताओं को सीबीआई का भय दिखाया गया था।
लोकसभा में गूंजा ‘जमूरा-मसखरा’
लोकसभा में बुधवार को जमूरा और मसखरा जैसे शब्द सुनाई दिए। रिटेल में एफडीआई पर चर्चा के दौरान उत्तेजित आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने भाजपा सदस्यों को जमूरा कह दिया। इससे सदन में भारी हंगामा हुआ और सदन की कार्यवाही भी स्थगित करनी पड़ी।
बाद में लालू ने यह शब्द वापस ले लिया, लेकिन लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने उन पर पलटवार करते हुए इशारों इशारों में कह दिया कि उन्हें मसखरी के अलावा कुछ बोलना नहीं आता। इस पर भी टोका-टाकी हुई। सदन में जब लालू बोलना शुरू किया था तो भाजपा की ओर से किसी ने कह दिया कि वह तो सरकार के साथ हैं। इस पर लालू नाराज हो गए और उन्होंने पलटकर भाजपाइयों को जमूरा कह दिया।
भाजपा सदस्यों ने इसे असंवैधानिक शब्द बताते हुए लालू से माफी मांगने की मांग पर हंगामा शुरू कर दिया। उत्तेजित लालू भी मैदान में उतर आए और माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया। इस पर सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। बाद में लालू ने कहा कि चूंकि यह शब्द असंवैधानिक है, इसलिए वे इसे वापस ले रहे हैं।