मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई के मसले पर सरकार के गले में फंसी हड्डी निकालने के लिए सपा और बसपा की एक तरफ तो यूपीए सरकार से साठगांठ की मुहिम चल रही है, वहीं दूसरी तरफ दोनों दल मध्यावधि चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी चुनावी बिसात बिछाने में भी जुटे हैं। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों दलों ने अपने 50 से 60 प्रत्याशियों को तय करने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है, हालांकि दोनों पार्टियों ने अपने एक भी उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया है।
इसके लिए दोनों दल एक-दूसरे की पहल के इंतजार में हैं। आला सूत्रों का कहना है कि सपा-बसपा ने अपने उम्मीदवारों को आम चुनाव के लिए तैयार रहने का संदेश दे दिया है। उम्मीदवारों का काम जल्द निपटाने को लेकर दोनों दलों का आकलन है कि लोकसभा चुनाव समय से पहले होंगे।
सपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी ने पहले ही उम्मीदवार तय कर दिए थे और चुनाव की तारीख आते-आते भी उम्मीदवारों के नाम बदले गए थे। सपा के रणनीतिकारों का कहना है कि जिन उम्मीदवारों के नाम बदले गए। उनकी ग्राउंड रिपोर्ट नकारात्मक होने के कारण उनका नाम अंतिम समय में बदला गया, जिसका सपा को बहुत फायदा हुआ।
उधर, बसपा ने अब अपने पुराने चेहरों पर दांव लगाना शुरू कर दिया है। मसलन, धनंजय सिंह की बसपा में वापसी की राह बन रही है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान बसपा सुप्रीमो ने उनकी छुट्टी कर दी थी। सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने भी कहा कि पार्टी बड़ी तादाद में उम्मीदवारों के नाम फाइनल कर चुकी है।