सरकार और संगठन में टूटे संवाद को कायम करने का बीड़ा आखिरकार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद उठा लिया है। यूपीए सरकार के बचे डेढ़ साल का एजेंडा अब खुद सोनिया गांधी तय करेंगी। वह चाहे सामाजिक क्षेत्र में निवेश का लक्ष्य हो या फिर कृषि में तरक्की और रोजगार बढ़ाने की बात।
कांग्रेस की शुक्रवार को होने वाली संवाद बैठक में प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्रियों को 2014 तक का चुनावी एजेंडा सौंपा जाएगा और साथ ही इस पर अमल करने की हिदायत भी दी जाएगी। चुनावी मोड में पहुंची कांग्रेस अब दुबारा सत्ता में काबिज होने की कोशिश में हर दांव लगाने के लिए तैयार है।
भ्रष्टाचार और महंगाई की वजह से खोया जनता का विश्वास दुबारा पाने की जुगत में अब लोक लुभावन फैसलों पर ज्यादा जोर देने की तैयारी है। लिहाजा, चुनावी घोषणा पत्र के पन्नों को शुक्रवार को सुरजकुंड की संवाद बैठक में पलटा जाएगा। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि सरकार के बचे डेढ़ साल में अब सरकारी कामकाज का एजेंडा संगठन की ओर से तय होने की बात है।
जनता के हक में फैसले हो या फिर उनके खिलाफ कोई भी कदम इसे मूर्त रूप देने से पहले कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी जरूरी होने की बात कही जा रही है। बैठक में पेट्रोल, डीजल, बिजली और रसोई गैस से पनप रहे जनाक्रोश से पार पाने की कोशिश भी की जाएगी। साथ ही सामाजिक क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी बैठक में सबसे पहले अपनी बात रखेंगी और इसी के आधार पर राजनीतिक विचार विमर्श आगे बढ़ेगा। इसके बाद प्रधानमंत्री देश की आर्थिक चुनौतियों से निपटने की सरकार की योजना को पार्टी के सामने रखेंगे, जबकि उनके बाद वित्त मंत्री पी. चिदंबरम आर्थिक स्थिति को लेकर चर्चा की शुरुआत करेंगे। जिसमें अन्य नेता भी अपनी बात रख सकेंगे।
इसके बाद चुनावी घोषणा पत्र का लेखा-जोखा किया जाएगा। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा कि मिली जुली सरकार की अपनी सीमाएं होती हैं। मगर सबसे बड़ी बात यही होती है कि पार्टी अपनी जिम्मेदारी समझकर अपने कामकाज का मूल्यांकन करे। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष दिन भर चली संवाद बैठक का निष्कर्ष अपने समापन भाषण में देंगी।
बैठक के दौरान भ्रष्टाचार और महंगाई के अलावा सिविल सोसायटी की बढ़ती ताकत और संसद के आगामी सत्र में सरकार और संगठन के बीच तालमेल बैठाने के मसले पर चर्चा हो सकती है। द्विवेदी के मुताबिक बैठक में कांग्रेस कार्यसमिति के 19 सदस्य, 16 स्थायी आमंत्रित सदस्य, 23 कैबिनेट और 12 राज्यमंत्री शामिल होंगे।