संसद में बहस के बाद जब सोनिया गांधी को अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो वह इस बात को लेकर चिंतित नहीं थी कि उनकी तबीयत को क्या हुआ है। बल्कि उनकी चिंता का विषय कुछ और था।
सोनिया इस बात से दिक्कत महसूस कर रही थीं कि उनका काफिला ट्रैफिक लाइट जंप करते हुए आगे बढ़ रहा है।
मंगलवार को घर लौटने वाली सोनिया निराश भी हैं, क्योंकि वह खाद्य सुरक्षा विधेयक पर हुई वोटिंग के दौरान मौजूद नहीं रह पाईं। जबकि बुखार होने के बावजूद वह लंबी बहस में बैठे हुई थीं।
राहुल गांधी और कुमारी शैलजा के साथ एसपीजी सुरक्षा से लैस उनकी गाड़ी जब एम्स की तरफ बढ़ रही थी, तो सोनिया को चिंता सता रही थी कि अस्पताल पहुंचने की जल्द में उनका काफिला ट्रैफिक सिग्नल तोड़ रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष के बयान से संकेत मिले हैं कि उनकी तबीयत ठीक नहीं थी, लेकिन सोनिया खाद्य बिल पर बहस और वोटिंग के दौरान संसद में मौजूद रहना चाहती थी, जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई।
सोमवार को जब वह भाषण देने के लिए खड़ी हुईं, तो उनके हाथों का कंपन बता रहा था कि सब कुछ ठीक नहीं है। बुखार की दवा लेने से भी उनकी तबीयत पर और असर हुआ।
उन्हें अचानक लगा कि तबीयत बिगड़ रही है और उन्होंने कुमारी शैलजा से कहा कि उन्हें जाना होगा। इसके बाद वह संसदीय कार्य मंत्री कमलनाथ के दफ्तर गईं, जहां डॉक्टर को बुलाया गया।