नेशनल हेरल्ड 'घोटाले' के शुरू में ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उनके बेटे राहुल गांधी को एक जबरदस्त झटका लगा है। सोनिया गांधी के बयानों से उनकी घबराहट का एहसास होता था। उन्होंने पटियाला हाउस अदालत के समन को खारिज करने की हाई कोर्ट में भरपूर कोशिश की लेकिन ये साफ हो गया कि अदालत में हाजिरी को टाला नहीं जा सकता। धीरे-धीरे उनकी घबराहट खत्म होती दिखाई दी और आत्मविश्वास वापस आता नजर आया।
मां-बेटे की जोड़ी ने शनिवार को अदालत में अपनी पेशी से सियासी मुनाफा कमाने की पूरी कोशिश की।जमानत मिलने के कुछ ही समय बाद सोनिया और राहुल ने मोदी सरकार पर भारी प्रहार किया। सोनिया गांधी ने कहा, "केंद्र सरकार अपने विपक्ष को निशाना बना रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं"। उन्होंने ये भी इल्जाम लगाया कि विपक्ष के खिलाफ सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।"
वहीं राहुल गांधी ने कहा, ''मोदी जी झूठे इल्जाम लगवाते हैं और सोचते हैं कि विपक्ष झुक जाएगा। मैं और कांग्रेस पार्टी नहीं झुकेंगे। हम एक इंच पीछे नहीं जाएंगे।''' ये मोदी सरकार के खिलाफ उसी तरह का इल्जाम था जैसा दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कुछ दिन पहले लगाया था।
मोदी सरकार के खिलाफ केजरीवाल की तरह लगाया इल्जाम
जाहिर तौर पर अपने एक चहेते सरकारी अफसर के खिलाफ सीबीसाई के छापों के बाद केजरीवाल ने बीजेपी सरकार को एक ज़ोरदार झटका दिया। उन्होंने न केवल ये दावा किया कि सीबीआई के छापे उनके दफ्तर पर किए गए थे बल्कि ये भी ज़ोर-ज़ोर से कहा कि सीबीआई वो फाइलें लेने आई थी जिनका सीधा संबंध वित्त मंत्री अरुण जेटली की नाक के नीचे हुई गड़बड़ी से है।
दिल्ली क्रिकेट एसोशिएशन में भ्रष्टाचार के खिलाफ कई सालों से खुद बीजेपी के सांसद कीर्ति आज़ाद आवाज़ उठा रहे थे। पार्टी के अंदर कुछ चश्मदीदों का कहना है कि केजरीवाल के इस हमले से अरुण जेटली हिल गए। इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी का रुख आक्रामक था जिसके बाद बीजेपी और उसकी सरकार बैकफुट पर चली गई।
केजरीवाल अपने दफ्तर में कथित छापे को पूरे विपक्ष के खिलाफ केंद्र का हमला क़रार देने में कामयाब दिखाई दिए। ममता बनर्जी से लेकर कई विपक्षीय नेताओं ने उनका समर्थन किया। लेकिन क्या सोनिया गांधी और राहुल गांधी अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के व्यक्तिगत इल्जाम को न केवल कांग्रेस पार्टी पर बल्कि पूरे विपक्ष पर हमला करार देने में कामयाब होंगे?
राहुल गांधी इस मामले के सामने आने के पहले दिन से ही कह रहे हैं कि ये मोदी सरकार की राजनीतिक बदले की कार्रवाई है। मोदी सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा कि ये मामला अदालत का है, सरकार का इससे लेनादेना नहीं है।
मुख्तार अब्बास नकवी का हमला
शनिवार को सोनिया और राहुल के बयानों के बाद बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने पलटकर उनके खिलाफ हमला किया। उन्होंने कहा, ''कोर्ट की लड़ाई कोर्ट में लड़िए। पूरा देश आपके परिवार की विरासत और उसकी सियासत को जानता है।''
जाहिर तौर पर नकवी की बात में दम है लेकिन उनकी बातों पर विपक्ष को कितना यकीन होगा? सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले को अदालत तक ले जाने वाले थे बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी।
लेकिन जब 2012 में वो अदालत गए थे, उस समय वो बीजेपी में नहीं थे। मगर कांग्रेस के नेता ग़ुलाम नबी आजाद का कहना है कि मोदी सरकार अब उन्हें कांग्रेस के खिलाफ इस्तेमाल कर रही है जिसका सबूत स्वामी को सरकारी घर और जेड श्रेणी की सुरक्षा है जो उन्हें दो दिन पहले ही दिए गए हैं और जो कांग्रेस के अनुसार सरकार की तरफ से स्वामी को एक इनाम है।
अगर सोनिया, सोनिया नहीं होतीं और राहुल, राहुल नहीं होते तो उनपर लगे भ्रष्टाचार के इल्जाम की गूँज अदालत से बाहर नहीं जाती। लेकिन इल्जाम के दायरे में घिरा परिवार कांग्रेस के लंबे इतिहास से आरंभ से जुड़ा है, इसलिए सियासत को इस अदालती मामले से अलग करना कठिन होगा। पार्टी के अंदर लोगों का कहना है कि मां और बेटा अब जेल जाने से नहीं घबरा रहे हैं। उन्हें लगता है कि इससे गांधी परिवार को सहानुभूति मिलेगी।
शायद मोदी सरकार भी सोनिया और राहुल को जेल भेजकर उन्हें हीरो नहीं बनाना चाहती। इंदिरा गांधी की जेल यात्रा से उनकी सियासी वापसी का इतिहास देश के राजनेता अब भी नहीं भूले हैं।