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कांग्रेस-भाजपा के बीच अगर तीसरे मोर्चे ने मारी बाजी, तो ये बनेंगे PM!

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राहुल गांधी द्वारा किसी को भी कांग्रेस का समर्थन न देने का ऐलान, प्रियंका गांधी का कहना कि किसी भी दल को बहुमत नहीं मिलेगा और भाकपा नेता एबी वर्धन का बयान कि मोदी को रोकने के लिए वाम मोर्चे को ममता बनर्जी के साथ जाने से भी कोई परहेज नहीं होगा, से संकेत मिलते हैं कि पर्दे के पीछे लोकसभा चुनाव के बाद की खिचड़ी पकनी शुरु हो गई है।
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राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और तीसरे मोर्चे के संभावित घटक दलों के बीच अनौपचारिक संवाद शुरु हो गया है और ऐसे नाम की तलाश भी शुरु हो गई है जो भाजपा और नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए प्रधानमंत्री पद के लिए सबको मंजूर हो।

सोमनाथ चटर्जी के नाम पर हो सकती है सहमति

इस कवायद में लगे राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अगर क्षेत्रीय दलों की सरकार कांग्रेस के समर्थन से बनती है तो पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के नाम पर सहमति हो सकती है।

चटर्जी के नाम पर लालू, नीतीश, शरद यादव, मुलायम, मायावती, जयललिता, करुणानिधि, ममता, वाम मोर्चा, शरद पवार, नवीन पटनायक सब तैयार हो सकते हैं।

एनडीए को बहुमत मिलने की संभावना नहीं

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक हालांकि अभी यह कहना बहुत जल्दबाजी होगी कि सोमनाथ चटर्जी के नाम पर चर्चा शुरु हो गई है, लेकिन कांग्रेस में शीर्ष स्तर पर यह विचार शुरु हो गया है कि जिस तरह यूपीए सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझान है, उससे कांग्रेस की सीटें निश्चित रूप से घटेंगी।

लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार, प.बंगाल, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, तमिलनाडु, असम, पंजाब, कर्नाटक, जम्मू कश्मीर, केरल की राजनीतिक स्थिति देखते हुए भाजपा और एनडीए को भी पूरा बहुमत मिलने की संभावना नहीं है।

मोदी को रोकने के लिए बनेगा मोर्चा

ऐसे में नरेंद्र मोदी और भाजपा को सरकार बनाने से रोकने के लिए यूपीए के घटक दलों और अन्य क्षेत्रीय दलों का मोर्चा बनाना पड़ सकता है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक मौजूदा माहौल में कांग्रेस के नेतृत्व में सरकार बनने की संभावना न के बराबर है। अगर कांग्रेस की सीटें सवा सौ के नीचे पहुंच गईं तो कांग्रेस तीसरे मोर्चे की सरकार बनवाने के लिए किसी एक सर्वमान्य नेता के नाम पर सहमति बनवाएगी। कांग्रेस नेता का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में कौन प्रधानमंत्री बने, इसके दो ही मापदंड होंगे।

मुलायम, ममता पर सहमति संभव नहीं

पहला जिसके पास सबसे ज्यादा लोकसभा सीटें हों, दूसरा जिसके नाम पर सब सहमत हों। इस दौड़ में मुलायम सिंह यादव, जयललिता, ममता बनर्जी, मायावती के नाम लिए जा सकते हैं। लेकिन इनमें एक दूसरे को कोई मानेगा, इसमें संदेह है।

दूसरा रास्ता साफ सुथरी छवि वाले सर्वमान्य नेता पर रजामंदी करवाने का है। मौजूदा गैर भाजपा राजनीति में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के बाद सोमनाथ चटर्जी ऐसे नेता हैं जिनके नाम पर कोई विवाद नहीं है और शायद ही किसी को एतराज हो। 
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वाम दलों को भी मंजूर होगा ये नाम

2004 में आम सहमति से लोकसभा अध्यक्ष चुने गए और कानून व संविधान के जानकार सोमनाथ चटर्जी को लंबा संसदीय अनुभव है। माकपा से अलग होने के बाद उनकी हर दल में इज्जत और स्वीकार्यता पहले से ज्यादा है।

धर्मनिरपेक्ष छवि के साथ सोमनाथ के कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत सपा नेता मुलायम सिंह यादव, बसपा नेता मायावती, राजद नेता लालू प्रसाद यादव, तृणमूल नेता ममता बनर्जी, डीएमके नेता एम.करुणानिधि, एआईडीएमके नेता जयललिता, जद(यू) नेता नीतीश कुमार, शरद यादव, एनसीपी नेता शरद पवार, बीजद नेता नवीन पटनायक समेत सभी क्षेत्रीय दलों के नेताओं से अच्छे रिश्ते हैं।

वाम दलों के लिए भी अपने पुराने कामरेड को नामंजूर करना आसान नहीं होगा।
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