साहित्यकारों के बाद वैज्ञानिकों और फिल्मकारों के पुरस्कार लौटाने की बात पर बीजेपी महासचिव मुरलीधर राव ने कहा कि हो सकता है कि कुछ लोग विरोध के लिए अपना पुरस्कार लौटा रहे हों लेकिन ज्यादातर लोग ऐसे हैं जो लोग बीजेपी के साथ अपना भविष्य सुरक्षित नहीं देखते।
ये वे लोग हैं जिनको लगता है कि बीजेपी के शासनकाल में उनका भविष्य बेहतर नहीं होगा। लोगों को भविष्य में भी अवॉर्ड लेने हैं, क्योंकि ऐसा कभी नहीं होता कि कोई अवॉर्ड आखिरी हो। सभी भविष्य में अवॉर्ड मिलने की पूरी संभावनाएं खोलकर रखना चाहते हें।
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में भाजपा महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा कि बीजेपी देश में एक नई तरह की राजनीति और सामाजिक व्यवस्था बनाना चाहती है।
हो सकता हो कि जो लोग पुरस्कार लौटा रहे हों वह बीजेपी की सोच के साथ सहज न हों। वह अपना भविष्य शायद बीजेपी के साथ नहीं देखते। राव ने कहा कि बीजेपी वही करती है है जो समाज चाहता है। बीजेपी का लगातार विस्तार करते जाना इस बात का संकेत है कि बीजेपी सही रास्ते पर है।
बीजेपी के लिए उपयोगी नहीं आएएसएस?
एक सवाल के जवाब में पी मुरलीधर राव ने कहा कि बीजेपी अपने कार्यकर्ताओं के भरोसे होती है आरएसएस के स्वयंसेवकों के नहीं। हम हर चुनाव अपने कार्यकर्ताओं के बूते लड़ते हैं। आरएसएस के स्वयंसेवकों का काम और बीजेपी के कार्यकर्ताओं का काम अलग-अलग होता है।
बीजेपी के कार्यकर्ता ट्रेनिंग प्रोग्राम के प्रभारी मुरलीधर राव ने कहा कि बीजेपी देश में तेजी से बढ़ने वाली पार्टी है। पार्टी चाहती है कि हर कार्यकर्ता को बीजेपी की पूरी कहानी और हमारे राजनीतिक उदेश्यों के बारे में अच्छी से जानकारी हो। आने वाले समय में हम 15 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने वाले हैं।
क्या बीजेपी संघ के कैडर से इतर कोई संगठन खड़ा करना चाहती है? इस प्रश्न के जवाब में मुरलीधर ने कहा कि बीजेपी का संगठन हमेशा से ही अलग रहा है। क्योंकि एक राजनीतिक दल के नाते कार्यकर्ता की भूमिका अलग होती है और आएएसएस में काम करने वाले स्वयंसेवक की अलग।
इस बात पर मुरलीधर राव मुस्कुराकर रह गए कि इन दिनों बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री दोनों ही लंबे समय तक संघ के स्वयंसेवक रहे हैं।
बीजेपी इसलिए नहीं देती सीएम का चेहरा
राज्यों के विधानसभा के चुनाव में बीजेपी सीएम का चेहरा दिखाने के बजाय मोदी के चेहरे पर चुनाव क्यों लड़ती है? क्या उसके पास राज्य में नेता नहीं हैं? इस प्रश्न के जवाब में मुरलीधर राव ने कहा कि बीजेपी के सीएम के चेहरे का एलान सोची और समझी रणनीति के तहत करती है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि बीजेपी के पास नेता नहीं होते।
राव ने कहा कि बीजेपी दरअसल चुनावों को युद्घ की तरह देखती है। युद्घ का एकमात्र मकसद युद्घ को जीतना होता है। बीजेपी युद्घ जीतने के लिए अलग-अलग तरीके के रणनीति बनाती है। इसमें हमें सफलता भी मिली है।
लोकसभा के चुनावों में हमने नेता घोषित करके लड़ा था जबकि विधानसभा चुनाव हम सामूहिक नेतृत्व में लड़ना चाहते हैं। यह पार्टी की सोची और समझी योजना होती है।