मुंबई हमले में बाल-बाल बचे समाज सेवी नारायण पाटिल बड़ी शिद्दत से उस दिन का इंतजार कर रहा है, जब अजमल कसाब को वह फांसी के फंदे पर लटकते देखेगा। इसी के लिए पिछले चार सालों से वह रोजाना राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इस आतंकवादी को जल्द से जल्द फांसी देने की गुहार लगा रहा है। 26 नवंबर, 2008 को अपने साथियों के साथ कसाब ने मुंबई शहर में मौत का कहर बरपाया था। मुंबई हमले में वह ही इकलौता शख्स है, जिसे जिंदा पकड़ा गया था। अब उसने फांसी से बचने के लिए राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी है।
न्याय के इंतजार में नारायण पाटिल 17 दिसंबर, 2008 से कल्याण तहसीलदार के कार्यालय में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्य के मुख्यमंत्री और राज्य के गृह मंत्री के नाम हर रोज पत्र डाल रहे हैं। सेना के रिटायर्ड सूबेदार के बेटे पाटिल ने कहा कि पिछले शनिवार तक वह तहसीलदार कार्यालय में 1372 पत्र भेज चुका है। मेरी सिर्फ यही मांग है कि कसाब को जल्द से जल्द फांसी पर लटकाया जाए।
पाटिल का मानना है कि ऐसे आतंकवादियों से निबटने का एकमात्र यही रास्ता है। पाटिल ने बताया कि जब तक कसाब को फांसी नहीं हो जाती, मैं कोई त्योहार नहीं मनाऊंगा। कल्याण के तहसीलदार शेखर घडगे ने भी पत्र लिखने की बात की पुष्टि करते हुए कहा कि कसाब की फांसी के लिए पाटिल दिसंबर, 2008 से प्रतिदिन पत्र लिख रहा है। हम यहां से इन पत्रों को उच्च विभाग को भेज देते हैं।
2008 की उस भयानक घटना को याद करते हुए पाटिल ने बताया कि मैं छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से निकला ही था, तभी वहां हमला हो गया। उन्होंने बताया कि मेरा एक दोस्त भी आतंकियों के हमले का शिकार हुआ। मेरी तरह कई लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है। उम्मीद है कि कसाब के साथ अफजल गुरु जैसा व्यवहार नहीं किया जाएगा, जिसे अब तक फांसी नहीं दी गई है।