नेताओं के बीच यूं तो सोशल मीडिया का इस्तेमाल अब आम बात हो गई है। बीजेपी, कांग्रेस समेत तमाम पार्टियों के नेता सोशल नेटवर्किंग साइटों की शरण में हैं। अपनी ब्रांडिंग से लेकर टिकट की दावेदारी तक का काम नेता फेसबुक के जरिए कर रहे हैं।
पहले तो कांग्रेस की तरफ से बीजेपी पर बार बार ये आरोप लगाया गया कि वो सोशल साइटों पर यूपीए सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है। लेकिन अब कांग्रेस भी इस मैदान में ताल ठोक रही है और उसके नेता भी अब सोशल मीडिया पर सक्रिय होते दिख रहे हैं।
आम आदमी पार्टी को तो ट्विटर और फेसबुक की ही संतान माना जाता रहा लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनावों में पार्टी ने खुद को साबित किया, और इसके बाद नेताओं में ये धारणा बन गई है कि फेसबुक का इस्तेमाल उसे चुनाव में जीत दिला सकता है।
टिकट के लिए सोशल मीडिया का सहारा
यूपी समेत कई राज्यों में नेता टिकट के लिए फेसबुक और ट्विटर का सहारा ले रहे हैं। नेताओं में ये आम धारणा बनती दिख रही है कि जिसके पेज पर अधिक लाइक होंगे या ट्विटर पर जिसके फॉलोअर अधिक होंगे वो टिकट का उतना ही मजबूत दावेदार माना जाएगा।
लोकसभा चुनावों के लिए टिकट के दावेदार नेता अब जो बायोडाटा तैयार करा रहे हैं उनमें वे सोशल मीडिया पर भी अपनी पहुंच का उल्लेख कर रहे हैं।
यूट्यूब पर नेताजी के भाषण अपलोड किए जा रहे हैं, फेसबुक पर जनसभाओं और नेताजी की एक्टिवनेस दिखाने वाली फोटो डाली जा रही हैं और ट्विटर पर उनके लिए ट्वीट्स डाले जा रहे हैं। इन सबका मकसद सिर्फ एक है और वो ये कि क्षेत्र में नेताजी की पैठ साबित की जा सके।
नेताओं को ब्रांडिंग की चाह
खास तौर पर क्षेत्रीय नेताओं में अपनी ब्रांडिंग की चाह हैं और इसके लिए ये लोग सोशल मीडिया की शरण में आ रहे हैं। कई नेताओं ने तो इसके लिए बाकयदा आईटी विंग बना कर प्रोफेशनल लोग इस काम पर रख लिए हैं जो पूरी शिद्दत के साथ नेताजी की नेतागिरी को पॉलिश करने का काम कर रहे हैं।
मौका चाहे उद्घाटन का हो या फिर आंदोलन का, नेताजी की हर फोटो फेसबुक पर मिल ही जाएगी। हाल ये हैं कि अब नेता अपने समर्थकों को गुड मॉर्निंग से लेकर गुडनाइट तक करते फेसबुक पर दिख जाते हैं।
यूपी के छोटे जिलों तक में नेताओं के बीच होड़ अब इस वर्चुअल प्लेटफॉर्म पर भी है। यही हाल राजस्थान औप एमपी का भी है। स्थानीय नेता भी अब अपनी ब्रांडिंग के प्रति सचेत हैं और सोशल मीडिया के प्रति गंभीर।
सोशल मीडिया से जीत की उम्मीद
नेताजी को उम्मीद है कि उनको सोशल मीडिया के जरिए जीत मिलेगी। स्मार्टफोन के जमाने में यूथ के वोटों के लिए नेताजी सोशल मीडिया पर आने को मजबूर तो हुए और साथ ही अब उनको ये उम्मीद भी है कि जीत उनके लिए मुश्किल नहीं होगी।
आम आदमी पार्टी की दिल्ली में जीत के बाद पूरे देश भर में नेताओं ने सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। सभाओं की जानकारी कार्यकर्ताओं तक पहुंचाई जा रही है और लोगों की राय मांगी जा रही है, जनता की परेशानियां अब नेता फेसबुक पर पूछ रहे हैं।
इस कदम से जनता के साथ संवाद स्थापित हो रहा है और इसी कारण नेताओं को जीत की उम्मीद भी है। सीधे जनता के साथ संवाद करने से नेता अब न केवल उनकी मुश्किलों को जान पा रहे हैं बल्कि अब उनको इलाकाई अफसरों की शिकायतें भी मिल पा रही हैं।