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तो इन कारणों से सुजाता सिंह को हटाया गया?

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विदेश सचिव सुजाता सिंह को हटाकर एस जयशंकर को उनकी जगह बिठाए जाने को मुद्दा बनाते हुए कांग्रेस ने सरकार को आड़े हाथ लिया है। कांग्रेस ने सरकार से सवाल पूछा है कि क्या सुजाता सिंह को खोबरागडे मुद्दे के चलते हटाया गया है?
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सुजाता सिंह को उनके पद से हटाया जाना एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है, क्योंकि सुजाता सिंह को ऐसे वक्त में हटाया गया है जब उनके रिटायर होने में छह माह का समय बचा था।

गौरतलब है कि सिंह पहली ऐसी विदेश सचिव हैं जिन्हें इस तरह से हटाया गया है, हालांकि इससे पहले भी साल 1987 में लगभग 28 साल पहले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने भी ए पी वेंकटेश्वरन को इसी तरह से हटाया था।
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ऐसे में सुजाता सिंह को उनके पद से हटाए जाने के कई संभावित कारण सामने आ रहे हैं।

कांग्रेस का आरोप खोबरागडे मुद्दे के चलते सिंह को हटाया गया

पूर्व सूचना प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने अपने ट्विटर पेज पर लिखा है कि क्या देवयानी खोबरागडे मुद्दे पर सुजाता सिंह के रुख के चलते ही उन्हें हटाया गया है? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति के दौरे के ठीक बाद उन्हें हटाया जाना महज इत्तेफाक है?

आपको बता दें कि देवयानी को वीजा धोखाधड़ी के मामले में उस वक्त गिरफ्तार किया गया था जब वह अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने जा रही थीं। उसी वक्त पुलिस ने उन्हें सार्वजनिक तौर पर हथकड़ी लगाई थी। इस गिरफ्तारी के बाद उनकी कपड़े उतरवाकर तलाशी ली गई थी।

साल 2013 में एक भारतीय राजनयिक के साथ अमेरिका में की गई इस बदसलूकी की भारत ने कड़ी निंदा की थी। हैरानी की बात यह रही कि देवयानी के साथ ऐसा सलूक ऐसे वक्त में किया गया जब वो न्यूयार्क में उप महावाणिज्य दूत के रूप में तैनात थीं।

Is sacking of Foreign Secretary late retribution for her stand on Devyani Khorbode affair? Removal after a Presidential visit"coincidental"?— Manish Tewari (@ManishTewari) January 29, 2015

सुजाता के काम और अनुभव से नाखुश थे मोदी!

जानकार बताते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह के काम-काज से खुश नहीं थे। सुजाता सिंह के उनके पद से हटाए जाने की सबसे बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि सुजाता सिंह के पास पड़ोसी देशों के साथ कामकाज का बेहतर राजनयिक अनुभव नहीं है।

जहां एक ओर पीएम नरेंद्र मोदी पड़ोसी देशों के साथ बेहतर रिश्ते बनाने को आतुर हैं वहीं सिंह का पड़ोसी देशों के साथ कामकाज का कम अनुभव इस काम की रफ्तार को मंद करने का प्रयास कर रहा था और यह बात मोदी को नागवार गुजर रही थी।

वहीं दूसरी ओर जयशंकर को विदेश सेवा में तीस साल से ऊपर का अच्छा खासा अनुभव है और वो सिंगापुर में उच्चायुक्त के पद पर भी रह चुके हैं। इतना ही नहीं वो चेक गणराज्य में भी भारतीय राजदूत के रूप में काम कर चुके हैं। जयशंकर चीन में भी भारत के राजदूत रह चुके हैं।
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मोदी को फायदेमंद लगा जयशंकर का काम और अनुभव!

एस जयशंकर अमेरिका और भारत के बीच होने वाली न्यक्लियर डील के दौरान भारतीय टीम के अहम सदस्यों में से एक थे। मोदी का मानना है कि जयशंकर का विदेश सचिव बनाया जाना भारत और अमेरिका के रिश्तों में और प्रगाढ़ता लाएगा।

दिलचस्प बात यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जयशंकर के काम से प्रभावित थे और वो जयशंकर को ही विदेश सचिव नियुक्त करना चाहते थे लेकिन सुजाता की वरिष्ठता के चलते वो ऐसा नहीं कर पाए।

गौरतलब है कि पिछले साल सितंबर महीने में जिस तरह से जयशंकर ने मोदी की यात्रा व्यवस्था को देखा था उससे मोदी काफी प्रभावित हुए थे और वो अपनी टीम में शामिल करना चाहते थे।
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