स्मृति ईरानी मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद से ही विवादों में घिरी हुई हैं। उन्होंने अपने 'पुराने परिचित' को नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी का चेयरमैन नियुक्त कर एक नए विवाद को न्योता दे दिया है।
विश्राम जामदार ने स्मृति को मानव संसाधन विकास मंत्री बनने के बाद बधाई दी थी और उन्हें एक पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे आरएसएस के सदस्य रह चुके हैं। उन्होंने स्मृति को याद दिलाया था कि वे उनके नागपुर स्थित आवास पर रुक चुकी हैं।
पत्र के कुछ ही दिनों बाद विश्राम जामदार को विश्वेषरैया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी (वीएनआईटी) का चेयरमैन नियुक्त कर दिया गया। ये संस्थान नागपुर में है।
सिफारिश को किया दरकिनार
शुक्रवार को स्मृति से नियुक्त के बावत सवाल किए गए तो उन्होंने जवाब देने से इनकार कर दिया। वीएनआईटी के चेयरमैन पद के लिए मानव संसधान विकास मंत्रालय को चार नामों की सिफारिश भेजी गई थी।
लेकिन मंत्रालय ने सभी नामों को दरकिनार कर विश्राम जामदार के नाम की सिफारिश राष्ट्रपति को भेजी। 15 सितंबर को राष्ट्रपति ने उसकी नियुक्ति पर सहमति की मुहर लगा दी।
केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ लेने के ठीक दो दिन बाद यानी 28 मई को विश्राम जामदार ने स्मृति इरानी को एक पत्र लिखा था।
आरएसएस से जुड़े रहे जामदार
पत्र में जामदार ने कहा, 'नागपुर में हमारे घर पर आप कुछ देर के लिए रुकीं थी और उसके बाद दिल्ली में भाजपा ऑफिस में आप से मुलाकात हुई। उन मुलकातों में मैंने और मेरे परिवार ने आप में एक अद्वितीय व्यक्तित्व पाया था।'
जामदार ने कहा कि हमें ये पूरा भरोसा है कि आपके नेतृत्व में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ऊचाइयों को छूएगा। उन्होंने पत्र के साथ अपना रिज्यूमे भी भेजा था। पत्र में अपनी आरएसएस पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए जामदार ने लिखा कि आरएसएस का सदस्य होने के बाद भी मैं अर्जुन सिंह के मानव संसाधन मंत्री होते हुए भी वीएनआईटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर में बना रहा तो ये मेरा काम बताने के लिए काफी है।
उन्होंने लिखा कि अपनी इसी पृष्ठभूमि के कारण मेरी इच्छा है कि मैं संस्थान के चेयरमैन के रूप मे काम करूं। 12 एनआईटी के चेयरमैन की नियुक्ति अब भी होनी है, लेकिन 29 अगस्त को स्मृति इरानी ने जामदार के नाम की सिफारिश कर दी।