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सिंहस्थ कुंभ के आगाज के बीच साध्वी का हंगामा

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सूर्य और बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश के साथ ही मंगलवार को नासिक सिंहस्थ कुंभ का आगाज हो गया। मेले की औपचारिक शुरुआत धर्म ध्वजा फहराने से हुई। पहले दिन कुशावर्त और रामकुंड में हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र गोदावरी में डुबकी लगाई।
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नासिक के रामकुंड में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और त्र्यंबकेश्वर (कुशावर्त) में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह तथा महाराष्ट्र की महिला व बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे की उपस्थिति में साधु-संतों व अखाड़ों के महंतों ने मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण किया।

तो वहीं दूसरी ओर ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान साध्वी त्रिकाल भवंता महाराज ने हंगामा कर दिया। साध्वी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मंच पर आ गईं और माइक हाथ में लेकर 14वें अखाड़े के रूप में मान्यता देने की मांग करने लगीं। इससे थोड़ी देर के लिए कार्यक्रम में विघ्न पैदा हो गया।
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हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी

पंच धातुओं के मिश्रण से तैयार की गई 50 किलोग्राम की धर्म ध्वजा में गुरु, सूर्य, चंद्र, गोदावरी व वाहन मगर, 10 दिशा, 12 राशि, ओम और स्वस्तिक के चिह्न बनाए गए हैं।

इस पताका को बनाने में करीब दो लाख रुपये खर्च हुए हैं। कुशावर्त में 31 फुट ऊंची धर्म ध्वजा फहराई गई है। कल तक एक दूसरे के आयोजन में नहीं जाने की चेतावनी देने वाले महंतों ने सामूहिक रूप से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान आकाश से हेलीकाप्टर के जरिए पुष्पवर्षा की गई।

भारतीय पंचांग के अनुसार जब सूर्य और बृहस्पति एक साथ सिंह राशि में प्रवेश करते है, तब पुरोहित संघ की ओर से धर्म ध्वजा फहराई जाती है और उसके साथ ही नासिक तथा त्र्यंबकेश्वर में सिंहस्थ कुंभ की शुरुआत होती है।

इस बार मेले के दौरान तीन दिन, 29 अगस्त और 13 तथा 25 सितंबर को शाही स्नान होगा। इस अवसर पर नासिक में 80 लाख से एक करोड़ तथा त्र्यंबकेश्वर में 25-30 लाख श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।

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मुख्यमंत्री के मंच पर साध्वी का हंगामा

ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान साध्वी त्रिकाल भवंता महाराज मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मंच पर आ गईं और माइक हाथ में लेकर 14वें अखाड़े के रूप में मान्यता देने की मांग करने लगीं।

इससे थोड़ी देर के लिए कार्यक्रम में विघ्न पैदा हो गया। साध्वी त्रिकाल भवंता अपनी मांग को लेकर प्रशासन और अखाड़ा परिषद के भी चक्कर लगा चुकी हैं लेकिन उन्हें महिला अखाड़े के रूप में अभी तक मान्यता नहीं मिल पाई है।

वैष्णव अखाड़े का मानना है कि वह संन्यासिनी हैं। इसलिए उनका अखाड़ा त्र्यंबकेश्वर में होना चाहिए जबकि त्र्यंबकेश्वर के शैव अखाड़े उन्हें अपने में समाहित करने को तैयार नहीं हैं।

फिलहाल वह नासिक के भाजपा विधायक बाला साहेब सानप के फार्म हाउस पर रह रही हैं। आमतौर पर कुंभ क्षेत्र में स्नान और शाही स्नान के समय सिर्फ 13 अखाड़ों को पेशवाई का मौका मिलता है।

इनमें वैष्णव संप्रदाय के तीन और शैव संप्रदाय के 10 अखाड़े शामिल हैं। साध्वी त्रिकाल भवंता की मांग है कि नासिक में इस बार महिलाओं के अखाड़े को भी पेशवाई का मौका मिले। भारतीय अखाड़ा परिषद एवं शंकराचार्य इसके विरोध में हैं।

साध्वी त्रिकाल भवंता महाराज परी अखाड़े से हैं। इस अखाड़े की नींव प्रयाग कुंभ के दौरान सन 2013 में रखी गई और 2014 में इसका पंजीकरण हुआ।
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