शरापोवा ये नहीं जानती कि सचित तेंदुलकर कौन हैं? ...और मैं शरापोवा को नहीं पहचान सका था?
ये सच है कि मैंने पहली बार जब शरापोवा को देखा तो पहचान नहीं पाया कि वो शरापोवा हैं? सचिन के फैंस शरापोवा की 'जाहिलियत' पर नाराज हैं, लेकिन मैंने भी ऐसी ही गलती की थी।
हालांकि शरापोवा ने तब वैसा हंगामा नहीं किया, जैसा आज सचिन के फैंस कर रहे हैं।
मेरे बगल में बैठी थी शरापोवा
10 जून, 2012 को मैं पेरिस के चार्ल्स डी गॉल एयरपोर्ट पर अपनी अगली फ्लाइट का इंतजार कर रहा था। रिपोर्टिंग के सिलसिले में मैं स्पेन जा रहा था। मेरे बगल में एथलीट सी दिखने वाली एक लड़की बैठी थी। बैठने का अंदाजा ऐसा था कि आप मन ही मन ये सोचें कि ये लड़की इतनी भाव क्यों खा रही है? कुछ ज्यादा ही जल्दबाजी में और तेवर में।
मैं जहां बैठा था, वहां चार्जिंग के लिए एक ही सॉकेट था। लैपटॉप चार्ज करने के लिए मैंने अपना प्लग सॉकेट की और बढ़ाया, तब तक एक और हाथ आया और सॉकेट में अपना प्लग डाल दिया। यह एथलीट सी दिखने वाली वही लड़की थी। आप यूरोप में हों और कोई ऐसी हरकत करे तो आप क्या सोचेंगे?
वह उजड्ड भी लगती, आत्मविश्वास भी झलकता
हमारे मुल्क में तो फटाक से पूछ लिया जाए- आपके पास तमीज है या नहीं? खैर, मैं ये तो नहीं पूछ सकता था। उस लड़की से मैंने बस ये कहा, 'कम से कम आपको शिष्टाचार तो बरतना चाहिए।' उसने जवाब दिया, 'मैं शिष्टाचार नहीं जानती।'
बहुत ही उजड्ड और अक्खड़ जवाब। मैं खामोशी से अपनी सीट पर बैठ गया। अपनी सीट पर वापस बैठने के बाद भी वैसे ही अक्खड़ बनी रही। मैं उसे देखता रहा और मन ही मन कोसता रहा। वह उजड्ड भी लगती लेकिन आत्मविश्वास भी झलकता।
मैंने पूछा, 'क्या आप मारिया शरापोवा हैं?
उसके सामानों में टेनिस रैकेट भी था और फ्रेंच ओपेन हाल ही में खत्म हुआ था। खैर, मैं कुछ भी सोचने के मूड में नहीं था। थोड़ी देर बाद मैंने अपना लैपटॉप ऑन किया। खबरें जानने के लिए गूगल किया। स्क्रीन पर उभरी कई तस्वीरों में एक तस्वीर कुछ जानी-पहचानी लगी। खबर फ्रेंच ओपन की थी। मारिया शरापोवा ने महिलाओं का खिताब जीता था।
ऐसा लगा शरापोवा को कहीं देखा है। लगा कि बगल मैं बैठी लड़की शरापोवा है। मैंने अपनी आशंका को खत्म करने के लिए एक बार फिर स्क्रीन देखी। बगल में बैठी लड़की हूबहू शरापोवा जैसी लगी। यकीन करने के लिए मैने पूछा, 'क्या आप मारिया शरापोवा हैं? 'जवाब आया, 'हां, मैं मारिया शरपोवा हूं।' शरापोवा मेरे बगल में बैठी थी और मैं पहचान नहीं पाया था।