मोदी सरकार के एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के उपलक्ष्य में 26 मई को आयोजित होने वाले उत्सव से शिवसेना ने कन्नी काटने की तैयारी कर ली है। पार्टी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे गर्मी की छुट्टियां बिताने लंदन रवाना हो गए हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने इस बारे में शिवसैनिकों को कोई निर्देश भी नहीं दिया है।
सूत्रों का कहना है कि वह जून के दूसरे सप्ताह में स्वदेश लौटेंगे। उधर, महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना के बीच संबंध बेहतर बनाने के लिए गठित समन्वय समिति में भी शिवसेना शामिल नहीं हुई है।
शिवसेना केंद्र और राज्य की भाजपानीत सरकार में शामिल है और सत्ता का भरपूर लाभ ले रही है, लेकिन महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान दोनों पार्टियों के बीच बनी खाई अब तक भर नहीं पाई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भले ही दावा करते हैं कि शिवसेना के साथ उनके संबंध मधुर हैं और उद्धव ठाकरे से उनकी नियमित बातचीत होती है, लेकिन इसमें सच्चाई नहीं दिखती।
शिवसेना में नहीं उत्सुकता
मोदी सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर 26 मई से पांच दिनों तक भाजपा कार्यकर्ता केंद्र सरकार की उपलब्धियां बताएंगे। इसको लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह है, लेकिन शिवसेना में कोई उत्सुकता नहीं है।
शिवसेना के सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार के एक साल का कार्यकाल पूरा होने पर पार्टी की ओर से किसी भी तरह का उत्सव नहीं मनाया जाएगा। इस बीच, महाराष्ट्र भाजपा अध्यक्ष राव साहेब दानवे पाटिल ने घटक दलों के साथ बेहतर संबंधों को लेकर समन्वय समिति गठित कर दी है।
इस समिति में रामदास अठावले की आरपीआई, राष्ट्रीय समाज पार्टी के महादेव जानकर, विधायक विनायक मेटे और राजू शेट्टी की स्वाभिमानी शेतकरी (किसान) संगठन शामिल हैं, लेकिन शिवसेना इसमें शामिल नहीं है। चर्चा है कि शिवसेना ने समिति में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
शिवसेना और भाजपा के बीच कई मुद्दों पर गतिरोध कायम
सहयोगी पार्टी होने के बावजूद शिवसेना और भाजपा के बीच कई मुद्दों पर गतिरोध कायम है। केंद्र और राज्य मंत्रिमंडल में समुचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलने के कारण शिवसेना पहले से नाराज है।
इसके अलावा जैतापुर परमाणु ऊर्जा परियोजना, भूमि अधिग्रहण विधेयक, मुंबई विकास प्रारूप जैसे मुद्दों पर शिवसेना का विरोध कायम है। नाराजगी की एक वजह यह भी है कि भाजपा किसी भी प्रोजेक्ट पर वीटो पॉवर का इस्तेमाल कर रही है।
हालांकि भूमि अधिग्रहण विधेयक को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उद्धव ठाकरे से फोन पर चर्चा कर समर्थन हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बनी।