भाजपा के साथ चल रही शिवसेना की अनबन और उलझती दिख रही है। रविवार को दोपहर में शिवसेना ने मोदी मंत्रिमंडल के शपथ ग्रहण का बहिष्कार किया और शाम को विधायक दल के नेता की घोषणा करते हुए विपक्ष में बैठने का बंदोबस्त कर लिया।
इसके बावजूद शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने बातचीत की गुंजाइश छोड़ रखी है। उन्होंने भाजपा को दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि वह एनसीपी से समर्थन के मामले में स्थिति साफ करे। उद्धव ने कहा है कि अगर एनसीपी भाजपा के साथ है, तो हम विपक्ष में बैठेंगे।
उद्धव ने भाजपा को चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर वह हिंदुत्व विरोधी ताकतों से हाथ मिलाएगी तो हम विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे। हम स्थिर सरकार चाहते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि हम किसी का भी साथ दें। सत्ता में रहें या न रहें। हम महाराष्ट्र की जनता के लिए काम करेंगे और उन्हें न्याय देंगे।
'एनसीपी से समर्थन का शिवसेना करेगी विरोध'
उद्धव ने शरद पवार पर निशाना साधते हुए कहा कि इशरत जहां को निरपराध और भगवा आतंकवाद बताने वाले शरद पवार पहले व्यक्ति हैं। इसलिए हिंदू विघातक शक्तियों से कोई समझौता नहीं हो सकता।
हम चाहते हैं कि हिंदुत्व शक्ति का विभाजन न हो इसलिए एक साथ रहना चाहते हैं। लेकिन अगर भाजपा एनसीपी के साथ जाना चाहती है तो हमारा रास्ता अलग है।
मोदी कैबिनेट में अनिल देसाई के शामिल नहीं होने के सवाल पर उद्धव ने कहा, "केंद्र में शपथ के लिए बुलाया, लेकिन राज्य में चर्चा नहीं की। मान न मान मै तेरा मेहमान, यह मेरी नीति नहीं हो सकती। हमने पहले ही राज्य की स्थिति स्पष्ट करने को कहा था उसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने की बात कही थी।"
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सुरेश प्रभु का भाजपा में जाना दुर्भाग्यपूर्ण है।
अंतिम समय तक दोनों दलों में चलती रही बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले मंत्रिमंडल विस्तार की मिठास को शिवसेना के बहिष्कार ने कड़वाहट में बदल दिया। शिवसेना ने केंद्र से पहले महाराष्ट्र की सरकार में शामिल होने के मसले को सुलझाने का निर्णय करने पर अडिग रहते हुए अनिल देसाई को ऐन मौके पर मोदी मंत्रिमंडल में शामिल होने से रोक लिया। इतना ही नहीं मोदी सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में अपने किसी नेता को नहीं भेजकर समारोह का अघोषित बहिष्कार किया।
बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार का पेच सुलझाने को लेकर भाजपा और शिवसेना के शीर्ष नेताओं के बीच अंतिम समय तक बातचीत चलती रही। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शिवसेना के सामने पहले केंद्र का फैसला होने और बाद में महाराष्ट्र का हल निकालने की बात रखी।
जवाब में उद्धव ठाकरे भी केंद्र से पहले राज्य का फार्मूला घोषित करने की मांग पर अडे़ रहे। दोनों ही दलों ने अंतिम समय तक एक-दूसरे के कदम पीछे खींचने के संकेत का इंतजार किया। उसके बाद अपनी रणनीति में बदलाव किया।
भाजपा से मांग पूरी होने के उम्मीद में शिवसेना ने मंत्रिमंडल में शामिल होने वाले नेता अनिल देसाई को रविवार को दिल्ली तक भेजा जरूर, लेकिन उन्हें फैसले के इंतजार में हवाई अड्डे पर ही रोके रखा। मगर जब बात नहीं बनी तो देसाई सरकार में शामिल होने की बजाय अगली फ्लाइट से बैरंग मुंबई लौट गए।
इससे पहले शिवसेना प्रमुख ने अपने दूत के रूप में शनिवार को केंद्रीय मंत्री अनंत गीते को प्रधानमंत्री से मिलने दिल्ली भेजा था। लेकिन उनकी पीएम से मुलाकात नहीं हो सकी थी।