पूर्व सपा नेता अमर सिंह के खिलाफ दर्ज मनी लॉड्रिंग और धोखाधड़ी के मामले में पुलिस की फाइनल रिपोर्ट को लेकर कानपुर से लेकर लखनऊ-दिल्ली तक घमासान शुरू हो गया है। मामले में एफआईआर दर्ज कराने वाले शिवाकांत त्रिपाठी पुलिस पर सबूतों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाते हुए शनिवार को प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने सेशन कोर्ट पहुंचे लेकिन किसी वजह से काम नहीं हुआ।
अब वह सोमवार को कोर्ट जाएंगे। उधर, अमर सिंह को क्लीन चिट के मामले में इंडिया अगेंस्ट करप्शन के प्रमुख अरविंद केजरीवाल भी मैदान में कूद पड़े हैं। टीम केजरीवाल के सदस्य विवेक ने शिवाकांत से सारे दस्तावेज मांगे हैं। इसी बीच, डीआईजी कानपुर नगर अमिताभ यश अचानक अवकाश पर चले गए हैं। थानेदार से लेकर आईजी तक इस प्रकरण पर बोलने से बच रहे हैं।
शिवाकांत त्रिपाठी ने अमर सिंह पर 55 फर्जी कंपनियां बनाकर 500 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए बाबूपुरवा थाना में एफआईआर दर्ज कराई थी। उन्होंने साक्ष्य के तौर पर जो दस्तावेज पेश किए उनमें अमर सिंह की पत्नी पंकजा और अभिनेता अमिताभ बच्चन सहित देश के कई बड़े लोगों के नाम भी थे। एफआईआर के मुताबिक यह लोग अमर सिंह की कई कंपनियों में डायरेक्टर थे। शासन से जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा (ईओडब्ल्यू) ट्रांसफर हुई जहां से हाईकोर्ट के निर्देश पर इसे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भेज दिया गया।
बीते माह ईडी ने जांच वापस कानपुर पुलिस को सौंप दी। पुलिस ने मात्र पांच दिन में ही साक्ष्य न मिलने की बात कहते हुए कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगा दी। शनिवार को एफआर को चुनौती देने के लिए शिवाकांत कोर्ट पहुंचे लेकिन किन्हीं कारणों से उनकी याचिका दाखिल नहीं हो सकी। शिवाकांत का कहना है कि उन्होंने पुलिस को अमर सिंह की कथित कंपनियों की बैलेंस शीट व अन्य दस्तावेजों के रूप में करीब 2000 पन्नों के सबूत दिए थे।
तीन साल विवेचना में पुलिस ने एक भी तथ्य और सबूत पर ध्यान नहीं दिया। उनका कहना है पुलिस ने जो एफआर दाखिल की है, उसके पक्ष में तथ्य देने के बजाय सबूत न मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है। दूसरी ओर अमर सिंह को राहत दिलाने की राह में अरविंद केजरीवाल खड़े हो गए हैं। वादी शिवाकांत ने बताया कि टीम केजरीवाल के सदस्य विवेक ने शनिवार सुबह उन्हें फोन कर अमर सिंह की कथित कंपनियों से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं।