शिवसेना की नाराजगी के डर से भाजपा चुनाव प्रचार अभियान समिति के अध्यक्ष और पार्टी के स्टार पुरुष गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मिलने उनके मुंबई स्थित निवास कृष्ण कुंज नहीं गए।
इसके विपरीत शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के रुख को नरम करने के लिए मोदी ने मातोश्री जाकर उद्धव से मुलाकात की। जबकि मोदी समेत भाजपा के कई बड़े नेता शिवसेना के साथ उसकी कटट्टर प्रतिद्वंदी राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को भी एनडीए में शामिल करके महाराष्ट्र में हिंदुत्ववादी ताकतों का एक वृहद गठबंधन करना चाहते हैं। लेकिन शिवसेना को यह मंजूर नहीं है।
इसलिए मोदी को मातोश्री बुलाकर शिवसेना प्रमुख ने मनसे प्रमुख और अपने चचेरे भाई राज ठाकरे को भी संदेश दे दिया है कि भाजपा के साथ उनकी दोस्ती शिवसेना को मंजूर नहीं है।
शिवसेना सूत्रों के मुताबिक इस मुलाकात में मोदी ने यही पूछा कि आखिर उन्हें लेकर ठाकरे का रुख कड़ा क्यों है और वह अपनी नाराजगी शिवसेना के मुखपत्र के संपादकीय के जरिए क्यों प्रकट कर रहे हैं।
जवाब में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें मोदी से कोई निजी नाराजगी नहीं है, प्रधानमंत्री पद की इच्छा रखने वाले नरेंद्र मोदी को अब गुजरात भावना से ऊपर उठकर राष्ट्रीय भावना से सोचना चाहिए।
साथ ही शिवसेना प्रमुख ने साफ कहा कि भाजपा महाराष्ट्र में दो नावों पर पैर न रखे। उसे शिवसेना और मनसे में एक को ही चुनना होगा।
गौरतलब है कि मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ भाजपा के पूर्व अध्यक्ष नितिन गडकरी और नरेंद्र मोदी दोनों के ही तार जुड़े हुए हैं।
भाजपा के शीर्ष नेताओ की बैठक में भाग लेने केलिए मोदी मुंबई आए थे। इस मौके का उन्होंने शिवसेना प्रमुख के साथ मुलाकात करके भाजपा शिवसेना के बीच पलने वाली गलतफहमी को दूर करने के लिए भी इस्तेमाल किया।
शिवसेना सूत्रों का कहना है कि मोदी और दूसरे भाजपा नेताओं को यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि शिवेसना की परंपरा उसके संस्थापक अध्यक्ष बाला साहब ठाकरे के समय से यही है कि पार्टी की रीति नीति का सार्वजनिक प्रकटीकरण संगठन के मुखपत्र सामना के संपादकीय के जरिए ही होता रहा है। इसलिए हाल ही में सामना के संपादकीय कोई नई घटना नहीं है।
सूत्रों के मुताबिक मोदी अपने मुंबई दौरे का सियासी भरपूर इस्तेमाल करना चाहते थे। गौरतलब है कि पिछले की कुछ दिनों से सामना में संपादकीय के जरिए शिवसेना मोदी को लेकर अपने सख्त तेवर दिखा रही थी।
भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह की कोशिशों के बाद उद्धव ठाकरे ने बयान देकर अपना रुख नरम किया था। लेकिन उन्होंने राजनाथ को साफ कह दिया था कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार मुंबई आकर मातोश्री में बाला साहब ठाकरे से मिलते रहे हैं।
लाल कृष्ण आडवाणी तो अक्सर मातोश्री आते थे। यह परंपरा जारी रहनी चाहिए। जद(यू) के एनडीए से बाहर होने के बाद अब भाजपा शिवसेना की नाराजगी मोल लेने की हालत में नहीं है। इसलिए तय किया गया कि मुंबई बैठक में भाग लेने के साथ साथ नरेंद्र मोदी मातोश्री जाकर उद्धव ठाकरे से मुलाकात भी करें।
मोदी को मातोश्री बुलाकर शिवसेना प्रमुख ने राज ठाकरे को भी राजनीतिक संकेत दिया है कि मनसे भाजपा से गठबंधन के सपने न देखे।