उत्तर प्रदेश की शिक्षण व्यवस्था में सुधार के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में 2001 में शिक्षामित्रों को संविदा कर्मचारियों के तौर पर रखा गया था।
प्राथमिक विद्यालयों में रखे जाने से लेकर सहायक अध्यापकों के पद पर समायोजन होने तक शिक्षामित्रों के साथ प्रदेश सरकारों ने लगातार राजनीति करने का काम किया।
प्रदेश में बनने वाली सरकारों ने इन शिक्षामित्रों को राजनीतिक हथियार के तौर इस्तेमाल करके उनको कहीं का नहीं छोड़ा है। अपने जीवन का महत्वपूर्ण 15 वर्ष शिक्षामित्रों की ओर से प्राथमिक विद्यालयों में खपाने के बाद अब उन्हें चौराहे पर खड़ा कर दिया गया है।