गंगा और उसकी सहायक नदियों पर बांध परियोजनाओं के दुष्परिणाम को लेकर जनता दल (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने नाराजगी जाहिर की है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ गंगा को अविरल और निर्मल बनाने के लिए सरकार बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर रही है वहीं दूसरी ओर निहित स्वार्थों के प्रभाव में पर्यावरण मंत्रालय गंगा के श्रोत हिमालय को ही खोदने, गिराने के लिए बांध कंपनियों को प्रोत्साहित कर रहा है। अगर सरकार इस मामले में नहीं चेती और गंगा की उद्गम घाटियों पर बांधों का निर्माण रद्द नहीं होता है तो देश भर में आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केवल गंगा-भागीरथी और अलकनंदा की घाटी में ही करीब 70 बांध परियोजनाएं हैं। पूरे उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में 450 जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण प्रस्तावित है। जहां भी बांध परियोजनाएं बन रही है वहां भूस्खलन, पानी के श्रोत सूखने, विस्फोटों से घरों में दरार आने की शिकायतें बढ़ी हैं।
उन्होंने कहा कि भविष्य की जल सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा और मौसम नियंत्रण के लिए हिमालय स्रोत है। देश की 50 करोड़ आबादी जिसकी सीधे-सीधे जल व खाद्य सुरक्षा गंगा और उसकी सहयोगी धाराओं से जुड़ी है, उसी गंगा के स्रोत हिमालय पर अतिक्रमण जारी है।