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शंकराचार्य ने RSS को दी नसीहत

Wed, 02 Jul 2014 05:55 PM IST
विनोद अग्निहोत्री/अमर उजाला, नई दिल्ली
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शिरडी के साईं बाबा को भगवान मानने से इनकार करने वाले अपने बयान की राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संघ के वरिष्ठ नेता एमजी वैद्य द्वारा की गई आलोचना के जवाब में द्वारिका और ज्योतिर्पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि संघ के शीर्ष नेता इस मुद्दे पर आकर मुझसे बात करें, मैं उन्हें समझा दूंगा कि मैंने जो कहा है वह शास्त्रों और सनातन धर्म की मर्यादा के अनुसार है।
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हरिद्वार से दिल्ली आए शंकराचार्य ने यह बात अमर उजाला से खास बातचीत में कही।

उन्होंने कहा, "या तो संघ नेतृत्व हिंदू धर्म के मर्म को समझें और उस पर अमल करे, वरना हिंदुत्व की बात करना छोड़ दे।"
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'उमा भारती से नहीं मांगा इस्तीफा'

केंद्रीय मंत्री उमा भारती का जिक्र करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि हमने या संत समाज ने उनका इस्तीफा नहीं मांगा, लेकिन मैं यह जरूर कहूंगा, "उमा भारती के गुरु पेजावर मठ के स्वामी विश्वेश तीर्थ ने इस मुद्दे पर मेरा समर्थन किया है। अब उमा भारती को अपने गुरु का अनुकरण करना है या साईं बाबा का इसका निर्णय वही करेंगी।"

शंकराचार्य का कहना है, "मैंने किसी को साईं की पूजा करने या गंगा स्नान करने से नहीं रोका है। मेरी आपत्ति हिंदू मंदिरों में हिंदू देवी-देवताओं के साथ साईं की मूर्ति लगाने और वैदिक मंत्रों में साईं का नाम जोड़कर पूजा करने को लेकर है। जिसकी आस्था साईं बाबा में है वह उनके साईं मंदिर में जाकर अलग से उनकी पूजा करे।"

स्वरूपानंद ने पूछे सवाल

स्वामी स्वरूपानंद ने कहा, "मेरे कुछ प्रश्न हैं जिनका उत्तर मुझे चाहिए। पहला प्रश्न है कि जो साईं की शरण में नहीं जाता तो क्या उसका उद्धार नहीं होता। दूसरा कि अगर साईं की शरण में जाने से ही उद्धार होता है तो साईं भक्तों को गंगा स्नान की क्या आवश्यकता है।"

शंकराचार्य ने कहा, "विरोध प्रदर्शन और पुतले जलाने से समस्या का समाधान नहीं होता है। अगर मैने प्रश्न किए हैं तो उनका उत्तर दिया जाना चाहिए। वाद विवाद और शास्त्रार्थ की परंपरा वाले इस देश में हिंसक प्रदर्शनों का कोई स्थान नहीं है। साईं भक्त ऐसा करके अपने गुरु की ही अवज्ञा कर रहे हैं।"
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'मैं शास्त्रार्थ को तैयार हूं'

शंकराचार्य का कहना है, "यह तर्क देने वाले कि लोग अपने माता-पिता और गुरु की भी पूजा करते हैं, इसका जवाब दें कि अपने माता-पिता और गुरु की पूजा की जाती है, दूसरे के माता पिता और गुरु की नहीं। उनका सम्मान किया जाता है।"

उन्होंने कहा, "हिंदू मंदिरों में देवी-देवताओं की प्रतिमाओं की पूजा उनकी वैदिक मंत्रों से प्राण-प्रतिष्ठा के बाद की जाती है। साईं भक्त बताएं कि वह किन मंत्रों से उनकी मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा करते हैं।"

शंकराचार्य ने कहा कि वह इस मामले में किसी से भी शास्त्रार्थ करने को तैयार हैं।
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