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यूपी: बैंक में 32 करोड़ का घोटाला, दो अफसर बर्खास्त

Fri, 28 Nov 2014 11:52 PM IST
संजय त्रिपाठी/अमर उजाला, कानपुर
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यूनाइटेट कॉमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक (यूसीसी) में हुए घोटाले के पीछे बैंक के सचिव प्रदीप सहाय का नाम खुलकर सामने आ गया है। इस संबंध में हुई सहकारिता विभाग की जांच में सहाय को 31 करोड़ 72 लाख और मैकरॉबर्टगंज शाखा के प्रबंधक संजय चौरसिया को 28 लाख रुपए के घपले में दोषी पाया गया है। दोनों को बर्खास्त करके एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोतवाली में तहरीर दी गई है।
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यूसीसी बैंक का कामकाज आरबीआई के निर्देश पर डेढ़ साल से ठप है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां लोन बांटने में फर्जीवाड़े के अलावा घोटाले-घपले हैं, जिन्हें रिजर्व बैंक कई साल बाद पकड़ पाया। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित बैंक से जुड़े लगभग एक हजार से ज्यादा एजेंट हुए, जिन्होंने डेली डिपॉजिट के लिए लोगों के खाते खुलवाए थे। पूर्व में हुए ऑडिट में खुलासा हुआ था कि किस तरह बैंक के सचिव प्रदीप सहाय ने अनाप-शनाप तरीके से करोड़ों के लोन बांट दिए। इस ऑडिट रिपोर्ट पर सहकारिता विभाग की ताजा रिपोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है।

विभाग के उप निबंधक के निर्देश पर अपर जिला सहकारी अधिकारी विजय शंकर शुक्ला की अध्यक्षता में एक कमेटी ने जांच की है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक बैंक में भारी पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और घपले की बात सामने आई है। रिपोर्ट में प्रदीप सहाय को बैंक में हुए 31 करोड़ 72 लाख रुपए का दोषी बताया गया है। इसके साथ ही मैकरॉबर्टगंज शाखा का प्रबंधक संजय चौरसिया भी 28 लाख रुपए के घपले का दोषी पाया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर दोनों अधिकारियों को बैंक से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही कोतवाली में दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई है।
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ग्राहकों पर बैंक बचाने का जिम्मा!

बैंक को डुबोने वाले तो मालामाल होकर एक किनारे हो लिए, अब बैंक को बचाने का जिम्मा ग्राहकों के सिर मढ़ा जा रहा है। ताजा घटनाक्रम के तहत रिजर्व बैंक को बैंक के कार्यवाहक सचिव विजय शुक्ला ने एक पत्र सौंपा है, जिसमें बैंक को चलाने की मंशा जताई गई है। यह भी कहा गया है कि बैंक की अंशधारिता बेचकर यह रकम जुटाई जाएगी। इस पर रिजर्व बैंक ने एक दिसंबर तक का वक्त दिया है।

उधर सूत्रों के मुताबिक बैंक की हालत को देखते हुए कोई बाहरी निवेशक पैसा लगाने को तैयार नहीं है, इसलिए बैंक के खाताधारकों को ही टोपी पहनाने की तैयारी है। इसके लिए बैंक के कलेक्शन एजेंट्स को शपथपत्र के रूप में फॉर्म दिए गए हैं। इसमें खाताधारकों के तमाम व्यक्तिगत ब्यौरे के साथ ही यह लिखकर देने को कहा गया है कि वे अपने खाते की शेष रकम से बैंक के शेयर खरीदना चाहते हैं। इसे लेकर विरोध हो रहा है।

प्रदीप सहाय ने मांगा फंड-ग्रेच्युटी
यूसीसी बैंक के पूर्व सचिव प्रदीप सहाय ने अपने दो माह का वेतन और फंड-ग्रेच्युटी की मांग की है। इसके लिए उन्होंने कोर्ट की शरण ली है। कोर्ट से इस बाबत एक नोटिस बैंक को आया है, जिसमें बैंक प्रबंधन का जवाब मांगा गया है।

सहकारिता विभाग के सहायक निबंधक एससी बाजपेई ने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट में बैंक में तमाम वित्तीय अनियमितताएं और घपले की बात सामने आई है। इसमें सीधे तौर पर प्रदीप सहाय व अन्य को दोषी पाया गया है। आरोपियों को बर्खास्त कर दिया गया है। कमेटी की रिपोर्ट की एक प्रति के साथ सहकारिता विभाग की ओर से कोतवाली थाने में एफआईआर के लिए तहरीर दी गई है। आगे की कार्रवाई पुलिस के स्तर से की जानी है।
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