यूनाइटेट कॉमर्शियल कोऑपरेटिव बैंक (यूसीसी) में हुए घोटाले के पीछे बैंक के सचिव प्रदीप सहाय का नाम खुलकर सामने आ गया है। इस संबंध में हुई सहकारिता विभाग की जांच में सहाय को 31 करोड़ 72 लाख और मैकरॉबर्टगंज शाखा के प्रबंधक संजय चौरसिया को 28 लाख रुपए के घपले में दोषी पाया गया है। दोनों को बर्खास्त करके एफआईआर दर्ज कराने के लिए कोतवाली में तहरीर दी गई है।
यूसीसी बैंक का कामकाज आरबीआई के निर्देश पर डेढ़ साल से ठप है। इसकी सबसे बड़ी वजह यहां लोन बांटने में फर्जीवाड़े के अलावा घोटाले-घपले हैं, जिन्हें रिजर्व बैंक कई साल बाद पकड़ पाया। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित बैंक से जुड़े लगभग एक हजार से ज्यादा एजेंट हुए, जिन्होंने डेली डिपॉजिट के लिए लोगों के खाते खुलवाए थे। पूर्व में हुए ऑडिट में खुलासा हुआ था कि किस तरह बैंक के सचिव प्रदीप सहाय ने अनाप-शनाप तरीके से करोड़ों के लोन बांट दिए। इस ऑडिट रिपोर्ट पर सहकारिता विभाग की ताजा रिपोर्ट ने भी अपनी मुहर लगा दी है।
विभाग के उप निबंधक के निर्देश पर अपर जिला सहकारी अधिकारी विजय शंकर शुक्ला की अध्यक्षता में एक कमेटी ने जांच की है। उनकी रिपोर्ट के मुताबिक बैंक में भारी पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और घपले की बात सामने आई है। रिपोर्ट में प्रदीप सहाय को बैंक में हुए 31 करोड़ 72 लाख रुपए का दोषी बताया गया है। इसके साथ ही मैकरॉबर्टगंज शाखा का प्रबंधक संजय चौरसिया भी 28 लाख रुपए के घपले का दोषी पाया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर दोनों अधिकारियों को बैंक से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही कोतवाली में दोनों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए तहरीर दी गई है।