शीर्ष जजों की नियुक्ति के लिए बने राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) को खारिज करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सरकार चकित है।
शुक्रवार को आए इस फैसले को सरकार ने संसदीय संप्रभुता पर आघात पहुंचाने वाला करार दिया है। हालांकि एटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने साफ किया है कि इस फैसले से न्यायपालिका और सरकार के बीच कोई तकरार नहीं है।
कानून मंत्री सदानंद गौड़ा ने सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका को खत्म करने का फैसला आश्चर्यजनक है।
गौड़ा ने दलील दी कि सरकार ने एनजेएसी के रुप में लोगों की इच्छा सामने रखी थी। इससे संबंधित बिल को लोकसभा और राज्यसभा की सौ फीसदी सहमति मिली। इसके अलावा नियम के मुताबिक इस बिल को 22 राज्यों के विधानसभा की मंजूरी भी मिली।