सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) और सतर्कता आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव के लिए केंद्र सरकार की खिंचाई की।
हालांकि इसके बाद सरकार ने आश्वासन दिया कि अदालत की सहमति के बगैर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जाएगा। सर्वोच्च अदालत ने सरकार को इस मसले पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
मुख्य सतर्कता आयुक्त और सतर्कता आयुक्तों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव का सवाल उठाते हुए सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इससे पक्षपात और भाई भतीजावाद को बढ़ावा मिलता है।
अदालत ने जानना चाहा कि इन पदों के लिए सिर्फ नौकरशाहों का ही चयन क्यों होता है, आम आदमी का क्यों नहीं। चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि चयन प्रक्रिया तो निष्पक्षता की निशानी होनी चाहिए और मौजूदा व्यवस्था की आलोचना हो रही है क्योंकि इसमें पारदर्शिता का अभाव है।
पीठ ने कहा कि कोई भी व्यवस्था, जिसमें चयन के लिए आंतरिक प्रक्रि या अपनाई जाती है, उसकी पारदर्शिता के अभाव के लिए जनता आलोचना करती है। अदालत ने कहा कि देश में प्रतिभा का भंडार है और लोग पारदर्शिता चाहते हैं।