सुप्रीम कोर्ट ने चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों की फांसी पर बुधवार तक के लिए रोक लगा दी है। चारों को 2004 में 22 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोप में फांसी की सजा सुनाई गई थी। राष्ट्रपति ने भी इनकी दया याचिका खारिज कर दी है।
सोमवार को चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की बेंच ने फांसी पर रोक लगाने की याचिका पर यह फैसला दिया। वीरप्पन के साथियों की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि इनकी दया याचिका पर फैसला लेने में सरकार को नौ साल से अधिक समय लग गया इसलिए इनकी फांसी की सजा रद्द कर देनी चाहिए।
गौरतलब है कि 1993 में कर्नाटक के पलार में बारूदी सुरंग विस्फोट मामले में वीरप्पन के बड़े भाई ज्ञानप्रकाश, सिमोन, मीसेकर मदैया और बिलावेन्द्रन को वर्ष 2004 में मौत की सजा सुनाई गई थी।
राष्ट्रपति ने प्रणब मुखर्जी ने 13 फरवरी को इनकी दया याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद फांसी की सजा रुकवाने के लिए इन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इनकी फांसी की तारीख रविवार, 17 फरवरी तय की गई थी।