सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदूषण आधुनिक जीवन का जरूरी ‘शैतान’है, यही सच्चाई है। कार, ट्रेन और विमान आज के जमाने के अभिन्न अंग हैं लेकिन इनसे फैलने वाले प्रदूषण की सीमा तय होनी चाहिए।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ की पीठ ने पाया कि विमानों से भारी वायु प्रदूषण होता है लेकिन विमान आधुनिक जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं।
न्यायमूर्ति ठाकुर ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण आधुनिक जीवन का सबसे जरूरी ‘शैतान’है। पीठ ने पाया कि दिल्ली अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में ध्वनि की अधिकतम सीमा 55 डेसीबेल निर्धारित है।
पीठ ने कहा कि विमानों के मार्ग के तहत आने वाले इलाकों में नि:संदेह ध्वनि का स्तर काफी होता है। पीठ ने आश्चर्य व्यक्त किया कि विमानों के मार्ग में आने वाले क्षेत्रों के लिए सरकार की ओर से ध्वनि की सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट एसोसिएशन की ओर से पेश वरिष्ठ वकील केके वेणुगोपाल ने कहा कि एयरपोर्ट के आसपास स्थित औद्योगिक, व्यावसायिक, रिहायशी इलाकों के लिए ध्वनि का स्तर निर्धारित किया गया है। उन्होंने बताया कि इसके लिए बाकायदा सर्कुलर जारी किया गया है।