सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सैनिकों को दुश्मनों के साथ लड़ाई लड़नी चाहिए न कि सरकार के साथ। शीर्ष अदालत की यह टिप्पणी इस मामले में अहम है क्योंकि पूर्व सैनिकों ने वन रैंक वन पेंशन को लेकर इन दिनों सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद कर रखा है।
न्यायमूर्ति अनिल आर दवे, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आदर्श गोयल की पीठ ने नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (सीएजी) और पूर्व रक्षा सचिव शशिकांत शर्मा सहित रक्षा और वित्त मंत्रालय के कुछ अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने से इंकार करते हुए यह टिप्पणी की है। मामला सैन्य अधिकारियों के रैंक पे को लेकर चल रह मुकदमे से संबंधित है।
पीठ का मानना था कि सरकार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ना सैनिकों के लिए आखिरी विकल्प होना चाहिए, पहले उन्हें उचित फोरम के समक्ष अपनी परेशानी रखनी चाहिए।
साथ ही पीठ ने कहा कि सरकार को चाहिए कि उनकेआग्रह पर त्वरित कार्रवाई हो। सैनिक जिसके हकदार हैं, उन्हें इसका भुगतान करना चाहिए। सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने भी पीठ को यह भरोसा दिलाया कि सरकार सैनिकों की परेशानी को लेकर गंभीर है।