अयोध्या में भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी समेत अन्य की ओर से विवादित ढांचा गिराने के कृत्य को राष्ट्रीय अपराध बताने की सीबीआई की दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई है। सर्वोच्च अदालत ने जांच एजेंसी से कहा कि इस मामले में अदालत का फैसला होने तक इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं करें।
जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सीबीआई की अपील पर सुनवाई के दौरान एजेंसी की शब्दावली पर कड़ी आपत्ति जताई। पीठ ने कहा कि कृपया इसे राष्ट्रीय अपराध या राष्ट्रीय महत्व का मामला न कहें। हमें अभी इसका फैसला करना है। हमारे या निचली अदालत की ओर से किसी भी पक्ष में फैसला सुनाए जाने तक आप इस तरह के बयान नहीं दे सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी तब की, जब सीबीआई की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीपी राव ने कहा कि भाजपा और विश्व हिंदू परिषद के नेता राष्ट्रीय साजिश में शामिल थे, जो रथ यात्रा से परिलक्षित होती है और यह राष्ट्रीय अपराध का मामला है। राव विशेष अदालत और हाईकोर्ट के फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर बहस कर रहे थे।
पीठ ने विशेष अदालत में सुनवाई में विलंब और दो अदालतों के फैसलों को चुनौती देने में हुई देरी पर भी सीबीआई से सफाई मांगी। पीठ ने कहा कि आप कहते हैं कि यह राष्ट्रीय महत्व का मामला है। तो क्या आप बता सकते हैं कि अनुवाद में कई दिन और मामला दाखिल करने में तीन महीने लगते हैं।
'कृपया इसे राष्ट्रीय अपराध या राष्ट्रीय महत्व का मामला न कहें। हमें अभी इसका फैसला करना है। हमारे या निचली अदालत की ओर से किसी भी पक्ष में फैसला सुनाए जाने तक आप इस तरह के बयान नहीं दे सकते हैं।'
- सुप्रीम कोर्ट