सुप्रीम कोर्ट ने पाक सेना द्वारा दो भारतीय सैनिकों की निर्मम हत्या कर शवों को क्षत-विक्षत करने का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में उठाने के लिए निर्देश देने की मांग पर केंद्र को नोटिस जारी किया है।
जस्टिस पी. सदाशिवम् व जस्टिस जेएस खेहर की पीठ ने गैर सरकारी संगठन सर्वमित्र की जनहित याचिका पर सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब किया है।
पीठ ने याचिका को पहले से ही लंबित एक अन्य याचिका के साथ संबद्ध करने का निर्देश भी दिया है। पहले से लंबित याचिका में कारगिल युद्ध के दौरान पाक सेना की ओर से भारत के एक और शहीद कैप्टन सौरभ कालिया का शव क्षत-विक्षत करने का मुद्दा उठाया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि आठ जनवरी को दो भारतीय जवानों की निर्मम हत्या के बाद सरकार की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया।
घटना अत्यंत घृणित और अमानवीय
इसमें अदालत के हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए कहा गया है कि यह घटना अत्यंत घृणित और अमानवीय है। इसलिए सरकार को पाकिस्तान की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय अदालत में ले जाने का निर्देश जारी करना चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान का कृत्य जेनेवा संधि का उल्लंघन है और उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इससे पहले शीर्षस्थ अदालत ने कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन कालिया के पिता की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया था।
कालिया को 1999 में पाकिस्तानी सैनिकों ने पकड़ लिया था और बर्बर यातनाएं देकर मार डाला गया था। कालिया पांच अन्य सैनिकों के साथ सीमा पर 15 मई, 1999 को गश्त पर निकले थे।
सरकार को निर्देश देने का आग्रह
कालिया के पिता ने न्यायालय से उनके बेटे के मामले को हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठाने के लिए सरकार को निर्देश देने का आग्रह किया था। गौरतलब है कि जनवरी में हुई घटना में पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सीमा में घुसकर दो जवानों की नृशंस हत्या कर दी और फिर एक की गर्दन काटकर ले गए।
पाक से उचित जवाब की उम्मीद
भारत को उम्मीद है कि कैप्टन सौरभ कालिया की मौत पर पाकिस्तान से उचित जवाब मिलेगा। विदेश राज्य मंत्री परनीत कौर ने कहा कि यह काफी दुखद और निंदाजनक घटना है। भारत सरकार इसकी घोर निंदा करती है।
हमें उम्मीद है कि हमने पाकिस्तान से जो सवाल पूछे हैं, उनके सही जवाब मिलेंगे। भारतीय मूल के ब्रिटिश वकील जस उप्पल ने इस मामले को ब्रिटिश संसद मानवाधिकार आयोग के समक्ष उठाने का फैसला किया है, इसी संबंध में वह जवाब दे रही थीं। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठा रहे हैं।