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मन की बात कह जज ने मोदी के डिनर पर जाने से किया मना

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सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश कुरियन जोसेफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से दिए डिनर में जाने से मना कर दिया। पीएम मोदी ने देश के चुनिंदा और शीर्ष स्तर के न्यायधीशों को डिनर पर आमंत्रित किया था। गौरतलब है कि गुड फ्राइडे और ईस्टर के मौके पर न्यायधीशों का सम्मेलन आयोजित करने पर पहले ही विवाद हो चुका है।
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न्यायधीश कुरियन जोसेफ ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीश एच एल दत्तू के सामने पहले ही यह सवाल उठाया था कि जजों की तीन दिवसीय कांफ्रेंस को ईस्टर की छुट्टियों के दौरान क्यों आयोजित किया जा रहा है? यही नहीं न्यायधीश कुरियन जोसेफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस बाबत पत्र लिख कर अपना मत बताया और पूछा था कि आखिर ऐसे दिनों में इस तरह की बैठकों को क्यों आयोजित किया जा रहा है।

1 अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे अपने पत्र में न्यायधीश जोसेफ कुरियन ने उनको धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि इस मौके पर आने में असमर्थ हूं। न्यायधीशों के सम्मेलन को ऐसे मौके पर आयोजित किया जा रहा है जिस समय गुड फ्राइडे मनाया जाएगा। गुड फ्राइडे का हमारे लिए बहुत ज्यादा धार्मिक महत्व है।
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मोदी को बताई अपने दिल की बात

यह अपने परिवार के साथ मनाने वाला एक धार्मिक आयोजन है। इसलिए मैं इस मौके पर अपने परिवार के साथ केरल में रहूंगा।

इसके साथ ही न्यायधीश कुरियन जोसेफ ने लिखा कि दिवाली, होली, ईद, बकरीद, क्रिसमस, ईस्टर का हमारे यहां बहुत ही महत्व हैं। उन्होंने कहा कि जब हम दीवाली, दशहरा, ईद, बकरीद के दौरान कोई ऐसा आयोजन नहीं करते हैं तो ईस्टर के दौरान भी ऐसा ही होना चाहिए।

उन्होंने‌ प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में यह भी कहा कि हमारे सांस्कृतिक त्यौहारों का बड़ा महत्व हैं। यह त्यौहार हम सब मिलकर बिना भेदभाव के एक साथ मनाते हैं। इसमे किसी तरह का भेदभाव नहीं होता है। हमारे इसी सांस्कृतिक त्यौहारों की तरफ पूरी दुनिया देखती है। पूरी दुनिया की नजर भारत की सुंदर धर्मनिरेपक्षता पर है। हमको पूरे विश्व के सामने ऐसा उदाहरण पेश करना होगा जिसे पूरी दुनिया अपने यहां लागू करे।
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