सुप्रीम कोर्ट ने चंदन तस्कर वीरप्पन के चार साथियों की फांसी की सजा पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा ही एक मामला दूसरी बेंच में लंबित होने के कारण फांसी की सजा के अमल पर रोक लगाई है। गौरतलब है कि वीरप्पन के साथियों गणनप्रकाशम, सिमोन एंटोनियप्पा, मीसेकर मदैया तथा बिलावेंद्रन को 1993 में कर्नाटक के पोलार में बारूदी सुरंग के विस्फोट में 22 पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में फांसी की सजा सुनाई गई थी।
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी हाल ही में इनकी दया याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद इन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। बुधवार को मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले को लंबित रखते हुए कहा कि इस याचिका पर दूसरी पीठ ने भी सुनवाई की है और उसने फैसले को सुरक्षित रखा है।
पीठ ने कहा, हमारे विचार में इस पर कार्यवाही तब तक स्थगित की जाती है, जब तक दूसरी पीठ इस मामले में अपना फैसला नहीं सुना देती, इसलिए हम मामले की सुनवाई छह महीने के लिए स्थगित करते हैं, ताकि दूसरी पीठ दूसरे लंबित मामले में अपना फैसला सुना सके।
इसने कहा, याचिकाकर्ताओं (वीरप्पन के सहयोगियों) को फांसी देने से संबंधित 18 फरवरी का अंतरिम आदेश जारी रहेगा। पीठ में न्यायमूर्ति एआर दवे और विक्रमजीत सेन भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि याचिका सजायाफ्ताओं की मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदलने से संबंधित है, जिन्होंने मौत की सजा में विलंब के आधार पर बदलाव की मांग की है।