बीसीसीआई के पावर हाउस एन श्रीनिवासन के खिलाफ दिए गए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जहां एक ओर उनके भविष्य पर तलवार लटक गई है वहीं आईपीएल में शामिल उनकी टीम चेन्नई सुपरकिंग्स पर भी संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
शीर्ष अदालत के निर्णय के बाद श्रीनिवासन की टीम को भी बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। हालांकि अभी कोर्ट ने उस पर निर्णय के लिए जजों की तीन सदस्यीय समिति बनाते हुए तीन महीने में निर्णय देने की बात कही है, लेकिन इसके बाद भी टीम का संकट दूर होता नहीं दिख रहा है।
क्योंकि कोर्ट ने श्रीनिवासन को जो दो विकल्प दिए हैं उनमें से दोनों में ही उनका तगड़ा नुकसान छुपा हुआ है। दोनों ही सूरतों में उन्हें अपनी टीम चेन्नई सुपर किंग्स से हाथ धोना पड़ सकता है। जिसकी वर्तमान कीमत कई हजार करोड़ रुपयों में बैठती है।
सुपरकिंग्स की बाजार कीमत है कई हजार करोड़
श्रीनिवासन के बीसीसीआई की गद्दी से अटूट प्रेम के पीछे भी इन्हीं हजारों रुपयों को बचाने की कहानी है। यह तो जगहजाहिर है कि आईपीएल में श्रीनिवासन की टीम को शामिल करने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया गया था। चेन्नई सुपरकिंग्स के लिए आईपीएल के सारे नियम दरकिनार कर दिए गए।
इसके अलावा मयप्पन के सट्टेबाजी से जुड़े होने का खामियाजा भी टीम को उठाना पड़ सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट बेशक चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ निर्णय न भी दे लेकिन बीसीसीआई की सत्ता पलटते ही श्रीनिवासन की टीम को बाहर होना पड़ सकता है।
इसके दो कारण हैं, पहला अगर श्रीनिवासन टीम छोड़कर बीसीसीआई में रहने का निर्णय करते हैं तो उनकी टीम अपने आप (नियमों को ताक पर रखने के कारण) आईपीएल से बाहर हो जाएगी। क्योंकि पूर्व में बीसीसीआई नियमों की अनदेखी पर दों टीमों (पुणे वारियर्स और हैदराबाद) को बाहर का रास्ता दिखा चुका है।
बीसीसीआई की प्रतिष्ठा से समझौता नहीं करेगा सुप्रीमकोर्ट
दूसरे, अगर वह बीसीसीआई की गद्दी छोड़कर केवल टीम के मालिक बने रहना पसंद करेंगे तो बीसीसीआई की सत्ता में भी बड़ा बदलाव हो सकता है। ऐसे में पहले से ही उनके खिलाफ मोर्चा खोले रखने वाला शक्तिशाली शरद पवार का धड़ा उनके खिलाफ कार्रवाई कर सकता है।
इस धड़े की अगुवाई आदित्य वर्मा भी (बीसीसीआई में भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने वाले) कर सकते हैं। यह भी संभव है कि नया निजाम बीसीसीआई की प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए भी चेन्नई सुपर किंग्स पर कार्रवाई कर सकता है।
यही कारण है कि श्रीनिवासन हर बार किसी न किसी हथकंडे से बीसीसीआई की सत्ता पर कब्जा बनाए रखना चाहते थे। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। वहीं सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद बीसीसीआई में श्रीनिवासन विरोधी गुटों के हौसले भी बुलंद हो गए हैं, ऐसे में वे दोबारा एकजुट होकर उनके खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं।