मानव तस्करी का बड़ा हब बन रहे यूपी के तराई इलाके में बचपन को बचाने के लिए कैलाश सत्यार्थी ने नया प्रयोग किया है।
उन्होंने नेपाल से सटे इलाकों में बालमित्र गांव बनाए हैं। इनमें ग्राम पंचायतें बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के साथ विकास योजनाएं बनाते समय उनके हित को ध्यान में रखती हैं।
नोबेल पुरस्कार विजेता सत्यार्थी ने तराई के लखीमपुर-खीरी और बहराइच से लेकर पूर्वांचल के मिर्जापुर तक 30 जिलों में बालमित्र गांव स्थापित करने के लिए 25-25 ग्राम पंचायतें चुनी हैं। यहां बच्चों को मानव तस्करों के चंगुल से बचाने की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान और पंच लेते हैं।
इसके अलावा वे अपनी बैठक में बच्चों को शामिल करते हैं और योजना बनाते समय ये ध्यान रखते हैं कि बाल मन पर कोई नकारात्मक प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।